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विकास दर आठ फ़ीसदी रखने का लक्ष्य | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद में पेश किए गए वर्ष 2003-2004 के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि इस साल महँगाई की दर लगभग पाँच प्रतिशत रहेगी. बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के सात से आठ प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य पाने की रूपरेखा भी रखी. सर्वेक्षण पेश करते हुए चिदंबरम ने कहा, "यदि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमत के बारे अनिश्चितता को छोड़ दें, तो मुझे लगता है कि वर्ष 2004-2005 में महँगाई की दर लगभग पाँच रहेगी. " उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार आर्थिक सुधार जारी रखेगी, विदेशी पूँजीनिवेश को प्रोत्साहन देगी, सामाजिक क्षेत्र को प्राथमिकता देगी और कर प्रणाली को सरल बनाएगी. उन्होंने कृषि उत्पाद बढ़ाने, औद्योगिक विकास दर दस प्रतिशत करने और महँगाई पर काबू पाने की बात भी की. उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था का 2003-2004 का लेखा-जोखा भी पेश किया. अनुमान है कि वर्ष 2003-2004 में सकल घरेलू उत्पाद 8.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा और अंतिम तीन महीनों में तो इसकी दर 10.4 प्रतिशत थी. पिछले वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई, उद्योग क्षेत्र 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा और सेवा क्षेत्र में वृद्धि की दर 8.4 प्रतिशत रही. उन्होंने लाभ कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण से भी इनकार किया. |
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