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नई शिक्षा नीति पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि एक नई शिक्षा नीति के निर्धारण के लिए नई समितियों का गठन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह समितियाँ मध्यम और दूरगामी नीतियों के गठन से जुड़े मामलों पर विचार करेंगी और उनके बारे में सुझाव देंगी. इस तरह की कुल सात समितियों का गठन किया जाएगा और इनमें से एक उच्च शिक्षा के संस्थानों की स्वायत्ता पर विचार करेगी जबकि एक अन्य पाठ्य पुस्तकों के स्वरूप पर ध्यान देगी. अर्जुन सिंह ने कहा कि यह समिति केवल सरकारी स्कूलों में ही नहीं बल्कि निजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली पाठ्य पुस्तकों पर भी नज़र रखेगी. छह महीने में रिपोर्ट उनका कहना था कि इन समितियों से अपेक्षा की जाएगी कि वे छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्टें दे दें. इस कार्रवाई को स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव के यूपीए सरकार के एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. केंद्र सरकार शुरू से ही आरोप लगाती आ रही है कि पिछली भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने किताबों में हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडा शामिल करके स्कूली पाठ्यक्रम के साथ छेड़छाड़ की है. भाजपा इस आरोप से सख़्ती से इनकार करती आ रही है. एक नई शिक्षा नीति पर विचार के लिए बुलाई बैठक से मंगलवार को पाँच भाजपा प्रशासित राज्यों के शिक्षा मंत्री वॉकआउट कर गए थे. |
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