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रिपोर्ट के बाद ही बदलेंगी किताबें-फ़ातमी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री एमएए फ़ातमी ने कहा है कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में नई संशोधित पुस्तकों को शामिल करने का मामला अभी एक जाँच समिति के पास है. समाचार एजेंसी पीटीआई से फ़ातमी ने कहा कि तीन सदस्यों वाली ये समिति अपनी सिफ़ारिश सरकार को देगी जिसके बाद ही कोई फ़ैसला किया जाएगा. फ़ातमी ने बताया कि समिति के सामने सिफ़ारिश देने के लिए कोई समयसीमा नहीं रखी गई है. उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम में इस वर्ष जुलाई में शुरू होने वाले सत्र से शामिल नहीं किया जा सकता है क्योंकि अभी इसमें कुछ समस्याएँ हैं. फ़ातमी ने पत्रकारों से कहा,"रिपोर्ट आने के बाद ही केंद्र सरकार ज़रूरी कार्रवाई करेगी". जाँच जाँच समिति ये देख रही है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पिछली सरकार ने पाठ्यक्रम में जो अंश शामिल करवाए थे उनमें से उन हिस्सों को कैसे निकाला जाए जिन्हें सांप्रदायिक बताया जा रहा है. फ़ातमी ने ज़ोर देकर कहा कि गठबंधन सरकार धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध है और भारतीय जनता पार्टी की सांप्रदायिक विचारधारा को सहन नहीं करेगी. उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने इसके पहले कहा था कि पिछले चार-पाँच सालों में शिक्षा पाठ्यक्रमों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है. उन्होंने बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम में कहा था पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'शिक्षा के भगवाकरण' की जो कोशिश हुई है उसे यह सरकार रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करेगी. |
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