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'पाठ्यक्रमों के साथ छेड़छाड़ हुई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि पिछले चार-पाँच सालों में शिक्षा पाठ्यक्रमों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है. उन्होंने कहा कि नई सरकार इस मामले पर सावधानीपूर्वक कोई फ़ैसला करेगी. बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में श्रोताओं के जवाब देते हुए अर्जुन सिंह ने कहा कि अगले आठ-दस दिनों में इसकी समीक्षा की जाएगी और इसके बाद ही वे इस मामले पर कोई सीधा जवाब दे पाएँगे. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'शिक्षा के भगवाकरण' की जो कोशिश हुई है उसे यह सरकार रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करेगी. शिक्षा पाठ्यक्रमों के मामले पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भी राज्य के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड में अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं थीं. लेकिन एनडीए सरकार ने इसकी अनदेखी करते हुए अपना एजेंडा लागू किया. समन्वय उन्होंने कहा कि नई सरकार की कोशिश एक बार फिर केंद्र और राज्य में समन्वय की कोशिश होगी और केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड जैसी संस्थाओं के कामकाज पर कोई दबाव नहीं होगा.
पिछली सरकार के दौरान ज्योतिष और कर्मकांड की पढ़ाई शुरू करने के मामले पर पूछे जाने पर अर्जुन सिंह ने कहा कि ऐसी पढ़ाई भारतीय जनता के हित में नहीं. लेकिन एक बार फिर उन्होंने दोहराया कि नई सरकार सावधानीपूर्वक इन सभी मामलों पर कोई फ़ैसला करेगी. आज भी देश की शिक्षा नीति 80 के दशक की है. यह पूछे जाने पर कि क्या यह उचित है, अर्जुन सिंह ने कहा कि एक बार 1990-91 में इसकी समीक्षा की गई है. लेकिन उन्होंने माना कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भी कहा था कि शिक्षा नीति की समीक्षा हर साल होनी चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई सरकार शिक्षा नीति की समीक्षा करेगी. |
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