|
परीक्षा-प्रणाली में बदलाव के लिए सुझाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद यानी एनसीईआरटी भारत में दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के ढर्रे में परिवर्तन के लिए कई सुझाव रखे हैं. छात्रों पर दबाव को कम करने के इरादे से सुझाए इन प्रस्तावों को एनसीईआरटी सारे भारत में मौजूदा सत्र से ही लागू करवाना चाहती है. एनसीईआरटी के निदेशक और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफ़ेसर कृष्ण कुमार ने बीबीसी के साप्ताहिक कार्यक्रम आप की बात बीबीसी के साथ में हिस्सा लेते समय इस संबंध में जानकारी दी. उन्होंने कहा,"परीक्षा केवल तीन ही घंटे की क्यों हो, चार घंटे की क्यों ना हो, क्योंकि सवाल ये नहीं है कि छात्र कितनी जल्दी सोचता है, बल्कि ये है कि वह छात्र किस हद तक सोच सकता है". उन्होंने कहा कि प्रस्तावों को छह जून को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम कार्ययोजना की बैठक में और सात जून को शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक कुछ बदलाव अमल में आ जाएँगे. परीक्षाएँ साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष केवल मार्च में ही परीक्षा के बजाय साल भर परीक्षा आयोजित करवाने की भी बात चल रही है. कृष्ण कुमार ने बताया कि छात्रों पर कॉलेजों में प्रवेश के लिए हर साल विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होने का भी दबाव रहता है जिसके बारे में भी सोचा गया है. उन्होंने कहा,"इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट आदि के क्षेत्र में एक छात्र को कई परीक्षाएँ देनी होती हैं और हम चाहते हैं कि एक ही परीक्षा हो, एक राष्ट्रीय संस्था परीक्षा ले और मेरिट लिस्ट तैयार करे". कृष्ण कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी सलाहकार की भूमिका निभाती है और विशेष रूप से केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा समिति यानी सीबीएसई के साथ काम कर रही है. उन्होंने भरोसा जताया कि सीबीएसई इन प्रस्तावों को लागू करेगी. उन्होंने कहा कि पूरे देश में अभी 43 परीक्षा समितियाँ हैं और ये अब उनपर निर्भर करता है कि वे कितनी जल्दी इन सुझावों को अमल में लाते हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||