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'वास्तुदोष के कारण विधायकों की मौतें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्यप्रदेश में एक विधायक की हाल में हुई मृत्यु के बाद नेताओं के एक वर्ग के बीच एक पुराना संदेह फिर से ताज़ा हो गया है कि विधायकों की आकस्मिक मौंतें विधानसभा भवन में वास्तु-दोष के कारण हो रही हैं. राजधानी भोपाल में 16 ऐसे विधायकों की एक लिस्ट घूम रही है जो तब से मौत का शिकार हुए हैं जब से विधानसभा का कामकाज नई इमारत में शुरु हुआ है. इन लोगों की मृत्यु का कहीं न कहीं कारण समझी जाने वाली इस ‘खोटी’ विधानसभा पर शिलान्यास के साथ ही भोपाल गैस त्रासदी घटित होने से मध्यप्रदेश के विभाजन तक का संगीन आरोप लगाया जा रहा है. राज्य की दयनीय आर्थिक स्थिति, बिगड़ती क़ानून व्यवस्था, बिजली की क़िल्लत और बदहाल सड़कों के कारणों में इस भवन की चर्चा तो है ही. इन स्थितियों से चिंतित सरकार ने तय किया है कि वह विश्व प्रसिद्ध वास्तुशास्त्री चार्ल्स कोरिया के डिज़ाइन किए गए इस विधानसभा का निरीक्षण अपने वास्तुशास्त्रियों से करवाएगी. मध्यप्रदेश के लोक निर्माण और ऊर्जा मंत्री कैलाश विजय वर्गीय कहते हैं कि निरीक्षण पर आधारित एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को पेश की जाएगी और अगर आवश्यकता हुई तो विधानसभा को वास्तुसंगत बनाने के लिए छोटी-मोटी तब्दीलियाँ भी की जा सकती हैं. दोष को दोष पेशे से इंजीनियर और वास्तुशिल्प के जानकार पंकज अग्रवाल ने वास्तुशिल्प के पैमानों पर इसे आंका है. वह कहते हैं कि 70 के दशक तक राज्य प्रगति की ओर अग्रसर था लेकिन फिर पुराने विधानसभा भवन यानी मिंटो हॉल में वास्तु के विपरीत निर्माण हुआ. मसलन, उत्तर की ओर दो मंज़िला इमारत का बनना और नई विधानसभा में तो वास्तुशास्त्र के हिसाब से ग़लत ही ग़लत है. भवन का गोल आकार, दक्षिण-पश्चिम से आती सड़क, वहाँ मौजूद छोटा तालाब और चंद पेड़ भी. वर्ष 1956 में मध्यप्रदेश के गठन से लेकर 1996 तक राज्य विधानसभा को भोपाल स्थित मिंटो हॉल में संचालित होता था जिसे बाद में चार्ल्स कोरिया के डिज़ाइन किए हुए इस भवन में भेज दिया गया. तबसे किसी न किसी रूप में इस भवन की डिज़ाइन पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. काँग्रेस की दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समय वास्तु-दोष की समाप्ति के लिए भवन में बजाबता यज्ञ भी किया गया और इसमें तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के शामिल होने पर यह मामला और भी विवादित हो गया था. अंधविश्वास वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी हरदेनिया इसे अंधविश्वास बताते हैं और कहते हैं, "कल को बुरा साया हटाने के लिए कुछ लोग भवन में बकरे की बलि देना चाहेंगे तो क्या उसकी अनुमति भी दी जाएगी?"
काँग्रेस विधायक अजेय सिंह कहते हैं कि अगर किसी कारणवश साल-दो-साल में एक या दो विधायकों की मौत हो भी जाती है तो इसे भवन में कमी मानना एक वहम के अलावा कुछ भी नहीं. विधानसभा भवन के निर्माण के लिए बनाई गई समिति के अध्यक्ष एमएन बुच कहते हैं कि डिज़ाइन तैयार करते समय चार्ल्स कोरिया ने भवन निर्माण के सभी पैमानों को ध्यान में रखने के अलावा वास्तु पुरुष मंडल नामक सिद्धांत को भी अपनाया. इस सिद्धांत को भवन की नाभि के समान माना जाता है जिससे ऊर्जा पैदा होती है. कथित वास्तुशास्त्रियों पर सवाल उठाते हुए बुच कहते हैं कि अगर इन सबको अपनी विद्या पर इतना भरोसा है तो वह इन बिल्डिंगों की बजाए बस्तियों में जाकर ग़रीबों की झुग्गी-झोपड़ियों को वास्तु संगत क्यों नहीं बनाते ताकि अगर ग़रीब अमीर न भी बन सकें तो कम से कम उन्हें दो जून की भरपेट रोटी और रोज़गार तो मिल जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें ज़हर साँप और अंधविश्वास का12 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस विवादों के बीच कला की नुमाइश22 जुलाई, 2006 | पत्रिका जादू मंतर के चक्कर में चक्करघिन्नी30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हल नहीं है ऐसे अंधविश्वास का14 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस मध्य प्रदेश का भूतों का मेला25 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस अँधविश्वास का एक और घिनौना रूप24 अक्तूबर, 2003 | भारत और पड़ोस कैसा होगा नया वर्ल्ड ट्रेड सेंटर18 दिसंबरजनवरी, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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