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कालीघाट मंदिर में पंडों पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता की एक अदालत ने सुप्रसिद्ध कालीमंदिर में पंडों पर रोक लगा दी है. भारत भर के मंदिरों में पंडे होते हैं जो पूजा आदि के कामों में भक्तों की 'सहायता' करते हैं. लेकिन आमतौर पर आरोप है कि ये पंडे पूजा में 'सहायता' करने की जगह पैसा वसूलने और परेशान करने का काम ज़्यादा करते हैं. पंडे इन आरोपों का खंडन करते हैं और वे पुजारियों और भक्तों के बीच एक पुल का काम करते हैं. रोक पंडों पर रोक लगाने का यह फ़ैसला कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विकास श्रीधर ने सुनाया है. अपने फ़ैलले में न्यायाधीश ने कहा है, "मंदिर के छह पुजारियों के अलावा कोई भी मंदिर के पूजा घर में नहीं जाएगा और ये छह पुजारी, जिन्हें सेवायत कहा जाता है, ही पूजा का कार्य करेंगे." न्यायाधीश ने कहा है कि उन्होंने मंदिर में ख़ुद भी पंडों का दुर्वव्यवहार देखा है. मंदिर जाने वाले दूसरे भक्तों का भी अनुभव इसी तरह का है. नियमित रुप से मंदिर जाने वाली सुमंत्रा बैनर्जी का कहना है कि ये पंडे भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं और भक्तों से बहुत पैसा वसूल लेते हैं. सुचित्रा डे एक गृहणी हैं और वे कहती हैं कि पंडों के कारण मंदिर जाना एक भयावह अनुभव होता है. ज़्यादातर भक्तों ने अपने इसी तरह के अनुभव के कारण इस फ़ैसले का स्वागत किया है. कुछ लोगों का कहना है कि इसी तरह की रोक पूरे भारत के मंदिरों में लगा देनी चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें खुल रहा है यूरोप का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर27 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस पुजारियों से संबंधित आदेश पर रोक14 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस पुजारी होने के लिए 'पंडित' होना ज़रूरी नहीं17 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मंदिर के मुख्य पुजारी सकते में08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस लेबनान के मंदिर में सारे भगवान25 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना हवा के शहर में आग का मंदिर05 जून, 2006 | पहला पन्ना स्वर्ण मंदिर को ज़मीन किसने दी?06 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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