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लेबनान के मंदिर में सारे भगवान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गोगराज अब से 25 बरस पहले होशियारपुर से सीरिया पहुँचा और वहाँ से लेबनान ऐसा आया कि पलट कर नहीं देखा. पिछले पाँच वर्षों से गोगराज और उसकी बीवी जूनिया में एक कंटेनर के अंदर एक कमरे में रहते हैं और बराबर वाले कमरे में ‘बालकनाथ शिव केसरी मंदिर’ है. गोगराज सिर्फ़ तीन घंटे सोता है. सुबह पाँच बजे एक फ़ार्म पर जाता है, वहां से ताज़ा खीरे बैंगन और टमाटर लेकर सब्ज़ी मंडी पहुँचता है, बेचता है और फिर दस बजे पार्किंग लॉट में पहुँचकर रात डेढ़ बजे तक हर आने जाने वाली गाड़ी को पर्ची देकर पैसे लेता है. रोज़ाना के ख़र्च से जो पैसा बच जाता है वह गोगराज मंदिर पर लगा देता है. अब तक गोगराज इस मंदिर पर अपनी जेब से चार-पाँच हज़ार डॉलर लगा चुका है. मंदिर में हर प्रकार के देवी-देवता मौजूद हैं और उन्हीं के बीच ईसा, मरियम, और सेंट पॉल की भी मूर्तियां हैं. गोगराज का कहना है कि इस मंदिर के लिए ज़मीन पार्किंग लाट के ईसाई मालिक ने दी है. जूनिया में बहुमत ईसाईयों की है, भगवान तो सब का एक ही है इस लिए मंदिर में ईसाइयों के देवी देवता क्यों नहीं रह सकते. गोगराज का कहना है कि जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ दो सौ लोग तक आ जाते हैं.
मैं गोगराज के साथ कोई 30 मिनट रहा, इस दौरान वह मुझसे बात भी करता रहा और भाग-भाग कर पार्किंग लॉट में आने वाली गाड़ियों को पर्ची भी देता रहा. मुझे और ड्राइवर को आम का शरबत पिलाया, गेरूए रंग की पगड़ी बांधकर और मंत्र छपी चादर ओढ़कर पालथी मार कर भी बैठा. कहने लगा तुम घंटी बजाओ मैं तुम्हारे लिए दिया जलाता हूँ. जब वह दिया जला रहा था तो उसके मोबाइल पर एक फोन आया. मंदिर में रिंगटोन बज उठा, ऐ दिल तुझे क़सम है हिम्मत न हारना, लेबनान में गुज़ारे तीस दिन में यह पहला क्षण था जब मेरी आंखों में आंसू आए थे. चलो आगे चलते हैं, मैंने ड्राइवर से कहा, साइड मिरर में गोगराज देर तक नज़र आता रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें हिंदू श्रद्धालुओं का पाकिस्तान दौरा16 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस ईसाई से फिर हिंदू बने04 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस फ्रांसीसी फिल्म से हिंदू नाराज़21 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन हिंदू के घर में बनी है मस्जिद14 अगस्त, 2006 | मनोरंजन अर्ज़ी लगाते हैं लोग देवता के पास04 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस इन रामनामियों को न मंदिर चाहिए न मूर्ति03 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस सौ साल से भी पुराना है अयोध्या का विवाद06 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस विदेशी फूल, देसी माली21 जून, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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