BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 21 जून, 2004 को 15:45 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
विदेशी फूल, देसी माली

फूलमंडी
तेज़ी से फल-फूल रहा है विदेशी फूलों का व्यापार
अगर फूलों की बात करने पर आपके दिमाग़ में बेला, गुलाब, चंपा, चमेली के रंग-सुगंध उभरते हैं तो कुछ लोग ऐसा मान सकते हैं कि आप वक़्त से थोड़ा पीछे चल रहे हैं.

ऑर्किड, कारनेशन, लिली, ट्यूलिप और एंथूरियम अब केवल यूरोप के घरों में ही नहीं सजते बल्कि भारत में ये फूल 'फ़ैशन स्टेटमेंट' बन गए हैं, इंपोर्टेड फूल महानगरों में इन दिनों मिठाइयों के डिब्बों से बेहतर तोहफ़ा माने जाने लगे हैं.

दक्षिण दिल्ली में रहने वाली राज शर्मा को देसी फूलों से ज़्यादा विदेशी फूल भाते हैं, "विदेशी फूलों में ताज़गी लंबे समय तक बनी रहती है और साज-सज्जा में वे कहीं अधिक आकर्षक लगते हैं."

भारत में फूलों की किसी दुकान पर आपको रंगबिरंगे गरबेरा या नीले रंग के लैवेंडर के फूल दिखें तो यह मत सोच लीजिएगा कि वे हॉलैंड या बेल्जियम से आए हैं, हो सकता है कि वे हरियाणा में उगाए गए हों.

ऐसा नहीं है कि फूलों का आयात बंद हो गया हो लेकिन बड़े पैमाने पर विदेशी फूलों की खेती भारत में ही हो रही है, देसी फूलों को भगवान की शरण में जाना पड़ा है.

 भारत में उगाए जा रहे विदेशी फूल इंपोर्ट किए गए फूलों से बेहतर हैं, इनकी क़ीमत कम है और क्वालिटी अच्छी है
फूल आयातक आरके वर्मा

गेंदा, चंपा, चमेली, मालती जैसे फूल अब मंदिरों-मज़ारों की ही शोभा बढ़ाते नज़र आते हैं या फिर नेताओं के गले में झूलते दिखते हैं.

आधुनिक बागवानी के कारोबार में लगे भारतीय लोगों ने फूल मँगाने के बदले हॉलैंड, जर्मनी, चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों से पौधे, बीज और कलम का आयात करना शुरू किया है.

दिल्ली के एक आयातक आरके वर्मा कहते हैं, "भारत में उगाए जा रहे विदेशी फूल इंपोर्ट किए गए फूलों से बेहतर हैं, इनकी क़ीमत कम है और क्वालिटी अच्छी है."

उल्टी गंगा

भारत न सिर्फ़ विदेशी फूलों की घरेलू माँग पूरा कर रहा है बल्कि आपको जानकर थोड़ा ताज्जुब भी हो सकता है कि भारत के कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, हरियाणा या उत्तरांचल के ग्रीनहाउसों में उगे फूलों का निर्यात हो रहा है.

ग्रीन हाउस
ग्रीनहाउसों में बड़े पैमाने पर खेती हो रही है

भारत से कारनेशन, बर्ड ऑफ़ पैराडाइज़, एंथूरियम जैसे फूलों का निर्यात जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर से लेकर खाड़ी के देशों तक में हो रहा है.

आरके वर्मा कहते हैं, "कम क़ीमत और अच्छी क्वालिटी के कारण भारतीय फूलों की विदेशी बाज़ार में भारी माँग है."

अब से लगभग दस वर्ष पहले भारत से सिर्फ़ 15 करोड़ रूपए के फूलों का निर्यात होता लेकिन अब यह धंधा तेज़ी से फल-फूल रहा है और निर्यात 175 करोड़ रूपए सालाना तक जा पहुँचा है.

सरकारी विभाग अपीडा में फ्लोरीकल्चरल विभाग के प्रमुख नवनीश शर्मा कहते हैं, "भारतीय फूल उद्योग की अपार संभावनाएँ हैं, अगर इसे सही मौक़ा मिले तो फूलों की खेती सोना उगल सकती है."

समस्याएँ

ऐसा न समझ लीजिए कि फूलों की खेती कोई फूलों की सेज है, काँटे भी बहुत हैं.

हरियाणा के एक फूल निर्यातक डीके जैन कहते हैं, "आधारभूत ढाँचे की कमी, अधिक ब्याज दर और सरकार अफ़सरशाही के कारण यह व्यवसाय अपनी क्षमता के अनुरूप तरक्की नहीं कर पा रहा है."

फूलमंडी
खुले बाज़ार में फूलों की बिक्री की मजबूरी

जैन बताते हैं कि सरकारी उपेक्षा के कारण हरियाणा के कई ग्रीनहाउस बंद हो गए हैं और कई बुरी हालत में हैं.

सुविधाओं की कमी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत की सबसे बड़ी फूल मंडियों में से एक, दिल्ली की मंडी खुले आसमान के नीचे लगती है.

हर रोज़ डेढ़ करोड़ रूपए का कारोबार करने वाली इस मंडी का काम धूप तेज़ होने से पहले सुबह के नौ बजे तक ख़त्म हो जाता है, ताज़ा फूल लेने हों तो सुबह पाँच बजे फूलमंडी पहुँचिए.

दिल्ली फ्लावर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अजय बरूआ खिन्न होकर कहते हैं, "सरकार वर्षों से एयरकंडीशंड मंडी का वादा कर रही है जबकि धूप, धूल और बारिश से फूल और व्यापारी दोनों परेशान हैं."

माली उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी कलियों का चमन खिलने से पहले नहीं मुरझाएगा.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>