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पुजारियों से संबंधित आदेश पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें राज्य के मंदिरों पर ब्राह्मणों या ऊँची जातियों का एकाधिकार ख़त्म करने की बात कही गई थी. इस साल मई में राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए इस बात की अनुमति दे दी थी कि राज्य के मंदिरों में किसी भी हिंदू जाति का व्यक्ति पुजारी हो सकता है. उस समय तक राज्य के मंदिरों में ऊँची जाति और ख़ासकर ब्राह्मण ही पुजारी बन सकते थे. राज्य सरकार के इस आदेश का पुजारियों के संघ ने विरोध किया था. सोमवार को मुख्य न्यायाधीश वाईके सब्बरवाल की अगुआई वाली खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने का आदेश दिया है. याचिका पुजारियों के संघ ने सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ कई याचिकाएँ दाख़िल की थी. याचिकाओं ने पुजारियों ने कहा था कि इस आदेश से हिंदुओं की रीति-रिवाज के निर्देशों का उल्लंघन होता है. पुजारियों ने याचिका में यहाँ तक कहा था कि ये आदेश हिंदुओं के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाते हुए इन आपत्तियों का जवाब देने को कहा है. तमिलनाडु में मई में ही सत्ता परिवर्तन हुआ था और जयललिता की जगह एम करुणानिधि की पार्टी ने सत्ता संभाली है. सत्ता संभालने के बाद एक आदेश जारी करके करुणानिधि की सरकार ने कहा कि किसी भी जाति का व्यक्ति पुजारी बन सकता है जब तक कि वह पुजारी का काम करने के योग्य हो. | इससे जुड़ी ख़बरें पुजारी होने के लिए 'पंडित' होना ज़रूरी नहीं17 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मंदिर के मुख्य पुजारी सकते में08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बद्रीनाथ मंदिर में दक्षिण के पुजारी24 मई, 2005 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में हिंदू सम्मेलन | भारत और पड़ोस शांतियज्ञ में लाठियों का प्रसाद | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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