|
'हमारी जीत उभरते साम्यवाद का संकेत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि हाल के चुनाव में उनकी पार्टी की जीत दुनिया में साम्यवाद के फिर से उभरने का संकेत है और धीरे-धीरे ये दुनिया के धनी देशों में भी फैल जाएगा. समाचार एजेंसी एएफ़पी के साथ विशेष इंटरव्यू में प्रचंड ने यह भी स्पष्ट किया कि कम्युनिस्टों को भी अब नई वास्तविकताओं को समझना होगा. नेपाल में संविधान सभा के चुनाव में माओवादियों को अच्छी ख़ासी सफलता मिली है. प्रचंड ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पार्टी बहुदलीय व्यवस्था में विश्वास करती है. काठमांडू से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हाविलैंड का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में जहाँ दुनिया के अन्य देशों से साम्यवाद ख़त्म हुआ है, वहीं नेपाल में स्थिति बिल्कुल अलग है. पिछले महीने हुए संविधान सभा के चुनाव में माओवादियों ने शानदार जीत हासिल की. और तो और माओवादियों को अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजनीति पार्टी से दोगुनी सीट हासिल हुई. एएफ़पी के साथ इंटरव्यू में प्रचंड ने कहा कि उनकी पार्टी की जीत विकासशील देशों में आ रही क्रांति का प्रतीक है और ये धीरे-धीरे विकसित देशों में भी फैल जाएगी. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि माओवादी एक पार्टी वाली व्यवस्था में विश्वास नहीं रखते और समाजवाद में भी बहुदलीय व्यवस्था अनिवार्य होती है. बहुदलीय व्यवस्था प्रचंड ने कहा कि बिना प्रतिस्पर्धा के सशक्त समाज का गठन नहीं हो सकता. नेपाल के माओवादियों ने पहले भी कई बार कहा है कि ऐसी बहुदलीय व्यवस्था ज़रूरी है.
हाल ही में माओवादी नेता सीपी गजुरेल ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा था कि अन्य देशों में साम्यवाद इसलिए नाकाम रहा क्योंकि उन्होंने प्रतिस्पर्धा की अनुमति नहीं दी थी. उन्होंने कहा था कि किसी भी पार्टी के लिए चुनाव में हारना और फिर जीत हासिल करके वापस आना सामान्य बात है. एएफ़पी के साथ विशेष इंटरव्यू में माओवादी नेता प्रचंड ने देश में निजी निवेश का भी समर्थन किया. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल की जनता और सरकार को निवेश की प्राथमिकताओं के बारे में फ़ैसला करना चाहिए. नेपाल में नई संविधान सभा की बैठक 20 मई के बाद होने वाली है और उम्मीद है कि संविधान सभा राजशाही को ख़त्म कर देगी. नेपाल में नई सरकार के स्वरूप के बारे में फ़िलहाल विचार-विमर्श चल रहा है. वैसे प्रचंड पहले ही ये कह चुके हैं कि वे गणतांत्रिक नेपाल के पहले राष्ट्रपति बनना चाहते हैं. वैसे नेपाली कांग्रेस के कुछ सदस्यों का कहना है कि मौजूदा प्रधानमंत्री जीपी कोईराला को इस पद पर बने रहना चाहिए लेकिन कई राजनेता इसका विरोध भी कर रहे हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका का माओवादियों से संपर्क 02 मई, 2008 | भारत और पड़ोस भारत-नेपाल संबंध सेमिनार26 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस प्रचंड ने राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई24 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'निर्वासन में जाने की ख़बर बेबुनियाद'21 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'19 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश को गद्दी छोड़ने का सुझाव16 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपालः पुलिस फ़ायरिंग, सात माओवादी मरे09 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'नेपाल में जनादेश स्वीकार करेंगे' 08 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||