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'नेपाल में जनादेश स्वीकार करेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष प्रचंड ने कहा है कि उनकी पार्टी नेपाल में जो भी जनादेश आएगा, उसे स्वीकार करेगी. उन्होंने कहा है कि वे चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेकर एक नया प्रयोग कर रहे हैं और यह शांति और क्रांति के एक नए मॉडल जैसा है. प्रचंड ने कहा कि उनकी पार्टी के बारे में झूठी अफ़वाहें फैलाई जा रही है. लोगों को गुमराह किया जा रहा है पर वो चुनाव को हर हाल में पूरा करवाना चाहते हैं क्योंकि उनका इन चुनावों से एक भावनात्मक संबंध भी है. नेपाल में गुरुवार को होने वाले चुनाव के मद्देनज़र वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर ने उनसे बातचीत की. प्रस्तुत है प्रमुख अंश- नेपाल में होने वाले चुनाव के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे. कहा जा रहा है कि आपकी पार्टी हिंसा भड़का रही है? हम एक ऐतिहासिक मोड़ पर हैं. संविधान सभा के द्वार पर पहुँचने के लिए हमने बहुत बड़ी कुर्बानी दी है. आठ साल तक हमने संविधान सभा तक पहुँचने के लिए लड़ाई लड़ी है. हमें बहुत खुशी हो रही है. जहाँ तक हिंसा की बात है तो यह कुछ मीडिया समूहों के ज़रिए अतिरंजित प्रचार हमारे बारे में किया जा रहा है. पिछले एक महीने के चुनावी अभियान के दौरान हमारे आठ कार्यकर्ता नेपाली कांग्रेस और यूएमएल ने मारे हैं जबकि एक भी विपक्षी नहीं मारे गए हैं. इसे सब जानते हैं. हम चाहते तो बदला ले सकते थे लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. मीडिया में यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि माओवादी ज़्यादा हिंसा भड़का रहे हैं जबकि इस चुनाव के साथ हमारा भावनात्मक संबंध है. हम इसे हर हाल में संपन्न कराना चाहते हैं. विपक्षी पार्टियाँ हार रही हैं इसलिए वे लोगों को गुमराह करने के लिए कह रहे हैं कि माओवादी हिंसा फैला रहे हैं. चुनाव से पहले ही आपकी पार्टी ने आपको राष्ट्रपति के तौर पर पेश किया है जबकि अभी यह फ़ैसला होना बाकी है कौन-सी प्रणाली संविधान सभा चुनेगी? जैसे नेपाली कांग्रेस और यूएमएल चाहती है कि प्रधानमंत्री के पास कार्याधिकार हों, वैसे ही हम चाहते हैं कि राष्ट्रपति प्रणाली हो, इसे स्पष्ट करने के लिए हमने ऐसा किया है. नेपाली कांग्रेस यह नहीं कह रही है कि वे गिरिजा प्रसाद कोइराला को प्रधानमंत्री बनाएगें या माधव नेपाल प्रधानमंत्री होंगे. वे मंजे हुए राजनीतिक खिलाड़ी हैं इसलिए वे स्पष्ट नहीं बोल रहे हैं जनता के सामने. हम साफ़-साफ़ बात करते हैं. राष्ट्रपति हमारी पार्टी के अध्यक्ष ही होंगे, हमने यह स्पष्ट कह दिया है लेकिन मुख्य सवाल है कि हम कौन-सी प्रणाली अपनाएँगे. लेकिन नेपाल के राजनीतिक विश्लेषकों को डर है कि यदि देश में राष्ट्रपति प्रणाली बनाने की आपकी बात नहीं मानी गई तो फिर आप पीछे हट जाएँगे, जैसा कि आपने अंतरिम सरकार बनने के समय किया था चुनाव में कोई भी नतीजे आएँ, चाहे वे हमारे पक्ष में हो या विपक्ष में, हम उन्हें स्वीकार करेंगे, शांति प्रक्रिया में हम आगे जाएँगे. हम नए संविधान बनाने की ज़िम्मेदारी को सहयोग करके पूरा करेंगे. पहले हम अंतरिम सरकार से इसलिए बाहर आ गए थे क्योंकि जो सहमति बनी थी उसपर कार्यान्वयन नहीं हुआ. सरकार उसे लागू करने के प्रति ईमानदार नहीं थी. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि आप दुस्साहिक नेता है. स्टेट्समैन के तौर पर आप ख़ुद को पेश नहीं कर पाए हैं. आपकी पार्टी ने राष्ट्रपति के रूप में आपको पेश कर बचकानी हरक़त की है? लोग अपनी राजनीतिक लाइन के मुताबिक टिप्पणी करते रहते हैं लेकिन यह सही नहीं है. इतिहास ने साबित किया है कि पुराने राजनेता बचकाने रहे हैं. वे राजा के सामने बार-बार घुटने टेक देते हैं. वे जनता को धोखा देते हैं. वे कैसे परिपक्व हो गए? जब हम कह रहे थे कि नेपाल में राजाशाही को ख़त्म किया जाए, गणतंत्र ज़रुरी है तो वे हमारे सिर मुंडाने की बात करते थे, हमारे ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस लगाते थे. वे मधेश के अधिकार की बात कभी नहीं करते थे. दो साल पहले तक आप एक ख़ास वर्ग का नेतृत्व कर रहे थे. क्या आपको लगता है कि अन्य वर्ग भी आपके साथ आएँगे जब आप आज लोकतंत्र के रास्ते पर हैं? हम जिस वर्ग के हितों की बात कर रहे थे, अब भी उसके प्रति ईमानदार हैं. हम सामंतवाद के ख़िलाफ़ हैं. जो भी सामंतवादी प्रभु, राजतंत्र के ख़िलाफ़ हैं, हम उनके साथ हैं. वो कोई भी वर्ग का हो सकता है. वह किसान हो सकता है, मज़दूर हो सकता है और पूंजीपति भी हो सकता है. हम उनका प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. हम पूरी नेपाली जनता का नेतृत्व करेंगे. हम सामंतवाद को ख़त्म करना चाहेंगे. आज आप चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं, इस बात को लेकर क्या आपकी पार्टी में कोई मतभेद है? अक्सर देखा जाता है इतना बड़ा राजनीतिक शिफ़्ट होने तक पार्टियों के अंदर बहुत कुछ टूट-फूट जाता है, गुट बन जाते हैं. हमारी पार्टी में भी शुरू में विवाद हुआ था. लेकिन अब ऊपर से नीचे तक सब एकमत हैं. यही एकमात्र सही रास्ता है. इसी रास्ते पर जाकर हम नेपाल को नई दिशा दे सकते हैं, नेपाली जनता की आकांक्षा को पूरा कर सकते हैं, दुनिया को कुछ दे सकते हैं. लोकतंत्र एक लंबी प्रक्रिया है. संविधान सभा में कई मुद्दों पर सहमति बनने में वक्त लग सकता है या सहमति नहीं बन सकती है. क्या आप धैर्य रखेंगे? पार्टी के अंदर काफी बहस के बाद हम इस प्रक्रिया तक पहुँचे हैं. यह हमारी नीति है. यह कोई छलावा नहीं है. शांति और क्रांति दोनों का एक नया मॉडल हम बना रहे हैं. एक नया प्रयोग हम कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में आज से काम संभालेंगे पर्यवेक्षक08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'राजशाही ख़त्म नहीं, तो चुनाव में बाधा'18 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में मधेशियों से बातचीत नाकाम27 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में चुनाव से पहले संशय का माहौल06 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल: प्रचार थमा, मतदान की तैयारी07 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाली शाही परिवार के भत्ते बंद 11 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस मंगलवार को जारी रहेगी शांतिवार्ता08 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस आसान नहीं है नेपाल में लोकतंत्र की राह27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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