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'राजशाही ख़त्म नहीं, तो चुनाव में बाधा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने सरकार से अलग होने की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि यदि संविधान सभा के चुनाव से पहले राजशाही को ख़त्म नहीं की जाती तो वे नवंबर में होने वाले चुनाव में बाधा पहुँचाएँगे. प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला ने कहा है कि राजशाही के बारे में फ़ैसला संविधान सभा को ही करना चाहिए. उल्लेखनीय है कि माओवादियों ने पिछले साल नवंबर में हिंसा छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आने का फ़ैसला किया था और फिर सरकार के साथ हुए शांति समझौते के तहत संसद में जाकर साझा सरकार में शामिल होना स्वीकार किया था. माओवादियों ने अभी संसद छोड़ने या शांति समझौता ख़त्म करने की घोषणा नहीं की है. वैसे अभी प्रधानमंत्री ने पाँच माओवादी मंत्रियों के इस्तीफ़े स्वीकार भी नहीं किए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि माओवादियों के अतिवादी खेमे को लग रहा है कि सरकार में रहकर कुछ ख़ास नहीं कर पा रही है और सरकार से अलग होने की घोषणा दबाव बनाने का तरीक़ा हो सकता है. चुनाव को लेकर उनका मत है कि अभी की स्थिति से लगता है कि वे चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे. रैली सरकार से अलग होने की माओवादियों की घोषणा के कुछ घंटों बाद बाद राजधानी काठमाँडू में कोई दस हज़ार माओवादी समर्थकों की एक रैली हुई है. इस रैली को संबोधित करते हुए माओवादी नेता बाबूराम भट्टाराई ने कहा, "हम चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आचार संहिता का पालन नहीं करेंगे और चुनाव से संबंधित सभी कार्यक्रमों में बाधा पहुँचाएँगे."
उन्होने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने सड़कों पर किए जा रहे उनके प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तो वे हिंसा का सहारा लेंगे. अपने समर्थकों के बीच उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और इसमें जो बाधा डालेगा उसका प्रतिकार करने का हमें पूरा हक़ है." इससे पहले माओवादियों और अंतरिम सरकार में शामिल सात दलों की बैठक हुई जिसमें राजशाही को लेकर मतभेद को दूर करने की कोशिश हुई, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. प्रधानमंत्री के निवास पर हुई बैठक का माओवादी नेता प्रचंड और बाबूराम भट्टाराई और उनके मंत्री बहिष्कार कर चले गए. वरिष्ठ माओवादी नेता कृष्ण बहादुर महारा ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने इस्तीफ़े दे दिए हैं. माओवादियों की मांग है कि चुनाव से पहले अंतरिम सरकार देश को गणराज्य घोषित करे जबकि गठबंधन के अन्य घटक चुनाव बाद इसकी घोषणा करना चाहते हैं. उल्लेखनीय है कि दो साल पहले राजा के ख़िलाफ़ नेपाल की जनता में नाराज़गी बढ़ गई थी और बड़े जन आंदोलन के बाद उन्होंने संसद को बहाल करते हुए अंतरिम सरकार को सत्ता सौंप दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में माओवादी सरकार से अलग हुए18 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में तेल संकट, भारत से आपूर्ति बंद10 मई, 2007 | भारत और पड़ोस लोकतंत्र स्थापना की पहली वर्षगांठ24 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस चुनाव आयोग मतदान के लिए तैयार नहीं13 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में सेना के हथियारों की जाँच शुरू10 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों को मिली सत्ता में भागीदारी01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन टला31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादी शामिल होंगे सरकार में31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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