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मंगलवार, 24 अप्रैल, 2007 को 09:56 GMT तक के समाचार
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लोकतंत्र स्थापना की पहली वर्षगांठ
गिरिजा प्रसाद
गिरिजा प्रसाद ने लोकतंत्र स्थापना की वर्षगांठ पर लोगों के बलिदान को याद किया
नेपाल में लोकतंत्र दोबारा स्थापित किए जाने की पहली वर्षगांठ के मौके पर वहाँ जश्न मनाया जा रहा है.

तीन दिनों तक घरों और सार्वजनिक स्थलों में रोशनी की जाएगी.

पिछले वर्ष इसी दिन नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता पर अपनी 14 महीने पुरानी सीधी पकड़ छोड़ दी थी और संसद को फिर से बहाल किया था.

नेपाल के हज़ारों लोगों ने पिछले साल राजा के ख़िलाफ़ करीब तीन हफ़्तों तक सड़कों पर प्रदर्शन किया था. इसी के बाद नेपाल नरेश सत्ता छोड़ने पर राज़ी हुए थे.

ये पूरा घटनाक्रम अब आधुनिक नेपाल में एक लोकगाथा की तरह याद किया जा रहा है. लोग इसे दूसरा जनआंदोलन मानते हैं.

'लोगों का बलिदान'

नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने इस मौके पर देश के नाम संदेश में आम लोगों की हिम्मत और बलिदानों को याद किया.

पहली वर्षगांठ के अवसर पर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जा रहे हैं. लोगों के दल सड़कों और शहरों की सफ़ाई कर रहे हैं.

पारंपरिक तौर पर राजशाही के प्रति वफ़ादार माने जाने वाली सेना भी विषेश आयोजन कर रही है.

पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान मारे गए 19 या उससे ज़्यादा लोगों की याद में बुधवार को विशेष सभा होगी.

समस्याएँ

राजा ज्ञानेंद्र
राजा ज्ञानेंद्र के अधिकार वापस ले लिए गए हैं

वैसे नेपाल अभी भी कई समस्याओं से जूझ रहा है. पूर्व माओवादी विद्रोही अब सरकार में शामिल हो चुके हैं और वे हथियार डाल चुके हैं.

लेकिन कई लोगों की शिकायत है वे अभी भी हिंसा की धमकी देते हैं, ख़ासकर अपने नए युवा कम्यूनिस्ट लीग के ज़रिए.

दक्षिणी नेपाल में कई लोग क्षेत्रीय स्वायत्तता की माँग कर रहे हैं और इस दौरान प्रदर्शनों में करीब 50 लोग मारे जा चुके हैं.

जून में होने वाले चुनाव की तारीख़ आगे बढ़ने को लेकर विभिन्न पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

लेकिन सकारात्मक पक्ष ये है कि गृह युद्ध ख़त्म हो चुका है और कर्फ़्यू जैसी चीज़ें पुरानी बातें हो चुकी हैं.

जहाँ तक बात राजा ज्ञानेंद्र की है, उनके अधिकार छीने जा चुके हैं. अब वे इंतज़ार कर रहे हैं कि क्या नई संविधान सभा राजशाही को पूरी तरह ख़त्म करेगी या नहीं.

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