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बुधवार, 11 जुलाई, 2007 को 17:45 GMT तक के समाचार
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नेपाली शाही परिवार के भत्ते बंद
नेपाली जनता
जनांदोलन के बाद संसद को बहाल करना पड़ा और तब से राजशाही हाशिए पर है
नेपाल सरकार ने फ़ैसला किया है कि राजा ज्ञानेंद्र और शाही परिवार के दूसरे वरिष्ठ सदस्यों को नियमित रुप से दिए जाने वाले सभी भत्ते बंद कर दिए जाएँ.

गुरुवार को पेश किए जाने वाले बजट में इसकी अधिकृत घोषणा कर दी गई है.

राजा और शाही परिवार के दूसरे वरिष्ठ सदस्यों को पिछले साल पाँच लाख अमरीकी डॉलर का भुगतान किया गया था.

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि शाही परिवार के लिए काम करने वाले 700 लोगों को अभी तनख़्वाह देना जारी रखा जाएगा.

हालांकि राजा और उनके परिवारजन सरकार से मिलने वाले भत्तों पर निर्भर नहीं हैं. उनके पास आय के अपने साधन हैं.

कहा जाता है कि उनके पास बड़ी संख्या में विभिन्न कंपनियों के शेयर हैं और कई होटलों में साझेदारी है.

हाशिए पर

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2006 में जनांदोलन के बाद राजा को संसद को बहाल करना पड़ा था और तभी से वहाँ राजशाही के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

नेपाल के नए राजनीतिक नेता, जिसमें पुराने माओवादी विद्रोही शामिल हैं, चाहते हैं कि नेपाल में राजशाही को ख़त्म कर दिया जाए.

राजा ज्ञानेंद्र
राजशाही की भूमिका पर अंतिम फ़ैसला संविधान सभा में लिया जाएगा

वैसे इसकी प्रक्रिया एक तरह से शुरु भी हो गई है. राजा को राष्ट्राध्यक्ष और सेना के प्रमुख के पद से हटाया जा चुका है.

राजा को पहली बार टैक्स भरने के लिए बाध्य किया गया है और उनसे कहा गया है कि वे जितना संभव हो अपनी गतिविधियाँ सीमित रखें.

उन्हें धार्मिक उत्सवों में पारंपरिक भूमिका निभाने से भी रोक दिया गया है.

पिछले शनिवार को जब राजा ज्ञानेंद्र ने अपना साठवाँ जन्मदिन मनाया तो सरकार के मंत्री और विदेशी राजनयिक इसमें शामिल नहीं हुए.

इस साल के अंत तक नेपाल में संविधान सभा का गठन होना है, जो यह तय करेगी कि भविष्य में राजा की क्या भमिका होगी.

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