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नेपाल में मधेशियों से बातचीत नाकाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार और मधेशी फ्रंट के बीच चल रही बातचीत नाकाम रही है. इसके बाद मधेशी फ्रंट ने कहा है कि वो अपना बंद और हड़ताल जारी रखेगा. इस बीच मधेशियों और नेपाल पुलिस के बीच हुई झड़प के दौरान पुलिस की गोली से एक व्यक्ति की मौत हो गई है. पिछले दो हफ्ते से नेपाल के दक्षिणी हिस्से में मधेशी आंदोलन जारी रखे हुए हैं. इस बंद के दौरान पूरे नेपाल में पेट्रोल और डीज़ल की क़िल्लत हो गई है. सड़क मार्ग बंद होने की वजह से नेपाल के दूसरे हिस्सों में तेल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. हाल ही में नेपाल मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले मधेशी फ्रंट के नेता राजेंद्र महतो ने बातचीत नाकाम होने के लिए नेपाल सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. महतो का कहना है, "सरकार को मधेशियों की मांग की कोई चिंता ही नहीं है." क्या है मधेशी आंदोलन ? मधेशी नेपाल में एक अलग मधेशी राज्य की मांग कर रहे हैं. नेपाल में मधेशियों की आबादी तक़रीबन 33 प्रतिशत है.
मधेशियों की ज़्यादातर आबादी नेपाल के दक्षिणी हिस्से में भारत से लगी हुई सीमा के पास बसती है. इनका कहना है कि वर्षों से मधेशियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है. मधेशियों का मानना है कि उन्हें सरकार में राजनीतिक अधिकार कभी नहीं दिए गए. वहीं मधेशी फ्रंट का एक और गुट चाहता है कि अप्रैल में होने वाले चुनावों को और कुछ दिनों के लिए टाला जाए. इस गुट के एक नेता का कहना है, "बातचीत नेपाल सरकार के ग़ैरज़िम्मेदार रवैये की वजह से ये बातयीत कामयाब नहीं हो सकी." दूसरी तरफ़ नेपाल की ज़्यादातर आबादी का मानना है कि चुनावों को टालना ख़तरनाक हो सकता है. उनका कहना है कि नेपाल सरकार भाषा और धर्म के आधार पर किसी राज्य का गठन नहीं करना चाहती. नेपाल में हिंसा जारी पिछले दो हफ्तों से जारी हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. नेपाल में पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में एक शख्स मारा गया है. इससे पहले भी इसी तरह की एक झड़प में एक प्रदर्शनकारी और एक पुलिसवाले की मौत हो गई थी. दक्षिणी हिस्से में ग़ैर-मधेशी राजनीतिज्ञों के घरों को निशाना बनाया गया है. प्रदर्शनकारियों ने कई नेताओं के घरों में आग भी लगा दी.
घायलों को अस्पताल ले जा रही कई एंबुलेंसों को भी निशाना बनाया गया है. कई इलाकों में कर्फ्यू लगा हुआ है. इन हिंसक प्रदर्शनों और बंद की वजह से पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. दरअसल, नेपाल में तेल और गैस की आपूर्ति भारत की सीमा की तरफ़ से होती है. इस आंदोलन ने ईंधन की भारी क़िल्लत पैदा कर दी है. इसके चलते स्कूलों और अस्पतालों के अलावा आम जनजीवन भी इस हड़ताल की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. |
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