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प्रचंड की राष्ट्रपति बनने की चाह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे नेपाल के माओवादियों के नेता प्रचंड ने कहा है कि राजशाही की समाप्ति के बाद उन्हें देश का पहला राष्ट्रपति बनने की उम्मीद है. प्रचंड ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि राजा ज्ञानेंद्र को ये पद छोड़ने के बाद उन्हें नेपाल में ही रहने की अनुमति दी जा सकती है. सत्तारूढ़ गठबंधन का कहना है कि इस साल के बाद राजशाही को समाप्त कर दिया जाएगा. नवंबर, 2006 में एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद माओवादी विद्रोहियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया था. साक्षात्कार के दौरान प्रचंड ने इस आशंकाओं को भी ख़ारिज नहीं किया कि माओवादी फिर से हथियार उठा सकते हैं. अप्रैल महीने में नेपाल के लोग संविधान सभा के लिए वोट डालने वाले हैं. संविधान सभा देश का नया संविधान लिखेगी. प्रचंड ने कहा कि देश भर के दौरे के बाद उन्हें भरोसा हो गया है कि उनकी माओवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आएगी. '... तो माफ़ कर देंगे लोग' उन्होंने यह भी कहा कि अपनी पार्टी के नेता के तौर पर वह स्वभाविक प्रक्रिया के तहत नए नेपाली गणराज्य के राष्ट्रपति बन सकते हैं.
उनका कहना रहा कि राजा ज्ञानेंद्र का भविष्य ख़ुद उनके काम पर निर्भर करेगा. प्रचंड ने कहा, "अगर वह संविधान के मुताबिक़ आम लोगों के फैसले को स्वीकार करते हैं, संविधान को मानते हैं तो आम लोग उन्हें एक आम नागरिक के रूप में यहाँ रहने की इजाज़त दे देंगे. इसमें कोई दिक्कत नज़र नहीं आती." संसद और सरकार में होने के बावजूद पिछले तेरह महीनों में अपनी गतिविधियों के कारण माओवादी अपने बहुत ज़्यादा दोस्त नहीं बना सके. ख़ासतौर पर सशस्त्र संघर्ष के दिनों में उनकी सेना में रहे युवा लड़ाकों पर फिरौती और लूटपाट के आरोप लगते रहे थे लेकिन प्रचंड का कहना है कि इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि अगर चुनाव परिणाम उनके लिए बुरे साबित हुए तो भी उनकी पार्टी उन्हें स्वीकार करेगी. प्रचंड का कहना था कि यदि सेना या समाज का कोई तबका "शांति प्रक्रिया के ख़िलाफ़ साज़िश रचने" की कोशिश करता है तो माओवादी फिर से हथियार उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह देश के ग्रामीण इलाक़ों से लड़ाई नहीं लड़ेंगे बल्कि हिंसा शहरी सड़कों पर शुरू हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल पर विस्तृत सामग्री21 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना नेपाल में चुनाव की नई तारीख़11 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस सरकार में शामिल हुए माओवादी30 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस राजशाही ख़त्म करने को मंज़ूरी28 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस देऊबा छह महीने बाद जेल से रिहा हुए14 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'ज्ञानेंद्र निर्वासित होंगे या मुक़दमा चलेगा'13 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने रखा बातचीत का प्रस्ताव07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादी हमले, 19 की मौत 01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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