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नेपाल में माओवादी हमले, 19 की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल से मिली ख़बरों में बताया गया है कि वहाँ एक माओवादी हमले में तीन सैनिक जवानों और 16 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई है. चरमपंथियों ने एक महीना पहले संघर्षविराम समाप्त करने की घोषणा की थी जिसके बाद यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है. पश्चिमी ज़िले, पालपा में मंगलवार की रात को हुआ यह हमला नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र के द्वारा लोकतांत्रिक सरकार के अधिकारों को ख़त्म करके पूरे शासन की बागडोर को अपने हाथों में लेने के ठीक एक वर्ष बाद हुआ है. ग़ौरतलब है कि राजा ज्ञानेंद्र ने एक फ़रवरी 2005 को सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने एक विशेष संबोधन में कहा कि वहाँ अगले हफ़्ते होने वाले नगर निगम के विवादित चुनाव रोके नहीं जाएँगे. ज्ञानेंद्र ने यह भी कहा कि नए संसदीय चुनाव अप्रैल 2007 में कराए जाएंगे. संसद 2002 में भंग कर दी गई थी. चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले लेने के ठीक एक साल बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने कहा है कि देश में लोकतंत्र आगे बढ़ रहा है और लोगों को वोट देना चाहिए. विपक्षी दलों का कहना है कि इस मौक़े पर सैकड़ों विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया. हमले पश्चिमी नेपाल में सैनिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछली रात माओवादियों ने सेना पर और तानसेन क़स्बे के तमाम सरकारी केंद्रों पर हमले किए हैं. एक सेना प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि इन हमलों में तीन सैनिकों की जानें गई हैं जबकि दो अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. सेना के एक अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी, रायटर्स को बताया "16 पुलिसकर्मियों और तीन जवानों की इन हमलों में मौत हो गई है जबकि कई सरकारी मुलाज़िमों सहित दर्जनों लोग अभी तक लापता हैं." चश्मदीदों के मुताबिक विद्रोहियों ने सैकड़ों की संख्या में सरकारी ठिकानों, अधिकारियों, बैरकों, जेलों और पुलिस के ठिकानों पर हमले किए हैं. विरोध इस बीच नेपाल नरेश के सत्ता हथिया लेने के एक साल पूरे होने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है.
उल्लेखनीय है कि माओवादियों से निपटने में असमर्थ रहने का आरोप लगाते हुए उन्होंने सरकार को एक फ़रवरी 2005 को बर्ख़ास्त कर दिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. टेलीविज़न पर दिए गए अपने संबोधन में में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा है कि पिछले 12 महीनों में नेपाल सही रास्ते पर आया है. उन्होंने कहा, "देश में आतंकवादी गतिविधियाँ घटी हैं और अब कुछ आपराधिक घटनाएँ ही हो रही हैं." उन्होंने लोगों से चुनाव में हिस्सा लेने की अपील करते हुए आश्वासन दिया है कि चुनाव निष्पक्ष और साफ़-सुथरे होंगे. राजा ने संबोधन में कहा कि चुनाव ही जनता के अधिकार देने और लोकतंत्र को मज़बूत करने का रास्ता है. नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल नगर निगम के चुनावों का विरोध कर रहे हैं और माओवादियों ने भी इन चुनावों का विरोध करते हुए कई उम्मीदवारों पर हमले किए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल नरेश ने कहा, चुनाव नहीं रुकेंगे01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस लोकतंत्र बहाली के लिए विरोध प्रदर्शन31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सैकड़ों उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ा29 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल के चुनाव में उम्मीदवारों की कमी27 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में प्रदर्शन और गिरफ़्तारियाँ जारी24 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में प्रदर्शन, पुलिस से झड़प21 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में रैली को रोकने के लिए कर्फ़्यू20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाली विपक्षी दल रैलियाँ करने पर अड़े17 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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