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लोकतंत्र बहाली के लिए विरोध प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के एक साल पहले सत्ता अपने हथिया लेने के विरोध में सात विपक्षी दलों ने बुधवार को देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है. विपक्षी दलों का कहना है कि इस म़ौके पर प्रदर्शन किया जाएगा और रैलियाँ निकाली जाएँगी. विपक्ष का कहना है कि मंगलवार को उनके सैकड़ों समर्थकों को गिरफ़्तार कर लिया गया. हालांकि आधिकारिक रूप से गिरफ़्तार लोगों की संख्या का पता नहीं चला है लेकिन विपक्षी दलों के एक प्रवक्ता का कहना था कि यह संख्या एक हज़ार तक हो सकती है. ग़ौरतलब है कि महाराजा ज्ञानेंद्र ने एक फ़रवरी, 2005 में सत्ता पर सीधे नियंत्रण कर लिया था. विपक्षी अगले सप्ताह होनेवाले स्थानीय निकायों का बहिष्कार की भी बात कह रहे हैं. उनका कहना है कि इससे नेपाल नरेश के शासन को वैधानिकता मिल जाएगी. अमरीका की अपील दूसरी ओर अमरीका ने नेपाल नरेश से लोकतंत्र बहाली की अपील दोहराई है. अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि माओवादी विद्रोहियों से निपटने के लिए लोकतंत्र आवश्यक है. प्रवक्ता का कहना था कि सत्ता अपने हाथ में लेने से सुरक्षा स्थिति और ख़राब हुई है और राजनीतिक दलों और नेपाल नरेश के बीच खाई और चौड़ी हुई है. बीबीसी संवाददाता के अनुसार नेपाल नरेश बुधवार को राष्ट्रीय टेलीविज़न पर कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं. नेपाल नरेश ने पिछले वर्ष निर्वाचित प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. इसकी वजह यह बताई गई थी कि देऊबा सरकार माओवादी हिंसा को रोकने में नाकाम रही. | इससे जुड़ी ख़बरें काठमांडू में प्रदर्शन और गिरफ़्तारियाँ जारी24 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल के चुनाव में उम्मीदवारों की कमी27 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में प्रदर्शन, पुलिस से झड़प21 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में रैली को रोकने के लिए कर्फ़्यू20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाली विपक्षी दल रैलियाँ करने पर अड़े17 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में गिरफ़्तारियाँ, भारत चिंतित19 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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