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नेपाली विपक्षी दल रैलियाँ करने पर अड़े | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में विपक्षी पार्टियों ने घोषणा की है कि काठमांडू में राजनीतिक रैलियों पर लगे प्रतिबंध की अवहेलना करते हुए वे अपने कार्यक्रम आयोजित करेंगे. नेपाली विपक्षी पार्टियों ने रात में कर्फ़्यू लगाए जाने का भी विरोध किया है लेकिन सरकार का कहना है कि ये क़दम सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं. सरकार का कहना है कि माओवादी विद्रोहियों के हमले का ख़तरा है जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में अपने हमले तेज़ कर दिए हैं. नेपाल के गृह मंत्रालय ने विपक्षी पार्टियों से कहा है कि वे रैलियों के आयोजन का इरादा छोड़ दें और सरकार से बातचीत करें. लेकिन विपक्षी पार्टियों ने इस अपील को ठुकरा दिया है, विपक्ष के प्रवक्ता कृष्णा सितौला कहा कि "असंवैधानिक सरकार से बातचीत का कोई अर्थ नहीं है." प्रतिबंध के बावजूद नेपाल की राजधानी काठमांडू में लोकतंत्र के समर्थन में विपक्षी गठबंधन के सात सदस्य दलों की एक संयुक्त रैली शुक्रवार को आयोजित की जा रही है. नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी 2005 में शेर बहादुर देऊबा की निर्वाचित सरकार को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथ में ले ली थी, इसकी वजह ये बताई गई थी कि सरकार माओवादी हिंसा को रोकने में नाकाम रही है. आलोचना इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था यूएनएचसीआर ने राजधानी काठमांडू में राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फ़ैसले की आलोचना की है. यूएनएचसीआर ने नेपाली सरकार के फ़ैसले पर अफ़सोस प्रकट करते हुए कहा कि इस तरह सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है. यूएनएचसीआर का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध से शांतिपूर्ण तरीक़े से एक जगह जमा होने के लोगों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानवाधिकार का उल्लंघन होता है. काठमांडू में सोमवार को नेपाली सरकार ने 'सुरक्षा कारणों' से रैलियाँ आयोजित करने पर रोक लगा दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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