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माओवादियों ने संघर्षविराम ख़त्म किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने आधिकारिक तौर पर संघर्षविराम ख़त्म करने की घोषणा की है. ये संघर्षविराम पिछले चार महीने से लागू था. माओवादी नेता प्रचंड ने एक बयान में कहा है कि सरकार की तरफ़ से कोई पहल नहीं हुई है इसलिए उनके पास संघर्षविराम ख़त्म करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. बयान में ये भी कहा गया है कि विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ माओवादियों का गठजोड़ जारी रहेगा. प्रचंड ने कहा है कि अगले महीने नेपाल में होने वाले स्थानीय चुनाव में माओवादी बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं. संघर्षविराम की अवधि सोमवार आधी रात को ख़त्म हो रही है. हिंसा संघर्षविराम को आगे बढ़ाने की विपक्षी पार्टियों और मानवाधिकार संगठनों की अपील के बावजूद माओवादियों ने इसे ख़त्म करने का फ़ैसला लिया है. कुछ राजनीतिक पार्टियों का कहना है कि नेपाल प्रशासन माओवादी विद्रोहियों को हिंसा की ओर लौटने के लिए उकसा रहा है. नेपाल नरेश ने पिछले साल फ़रवरी में सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. सरकार माओवादियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा अभियान बंद करने से मना कर चुकी है. 1996 के बाद से माओवादियों द्वारा की गई हिंसक वारदातों में अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संघर्षविराम ख़त्म करने के क़दम के बाद आशंका जताई जा रही है कि नेपाल में हिंसा बढ़ सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में सैनिक ने 12 की हत्या की15 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में बंद से आम जनजीवन प्रभावित16 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में संघर्षविराम की अवधि बढ़ी02 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'राजशाही के मुद्दे पर पुनर्विचार संभव'27 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत ने नेपाल में हुए समझौते को सराहा23 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस माओवादियों से गुपचुप मिले नेपाली नेता18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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