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रविवार, 27 नवंबर, 2005 को 13:07 GMT तक के समाचार
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'राजशाही के मुद्दे पर पुनर्विचार संभव'
प्रचंड
नेपाल में प्रमुख विपक्षी पार्टियों और माओवादी विद्रोहियों की बीच 12 सूत्रीय समझौता हुआ है
नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि अगर राजशाही नेपाल में संविधान सभा के लिए निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए तैयार हो, तो उनका गुट राजशाही के मुद्दे पर फिर से विचार कर सकता है.

बीबीसी को दिए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि ये चुनाव अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगरानी में होने चाहिए.

 अगर राजशाही नेपाल में संविधान सभा के लिए निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए राज़ी हो, तो राजशाही के मुद्दे पर फिर से विचार हो सकता है.
प्रचंड, माओवादी नेता

माओवादी नेता का कहना था, “मैं इस चुनाव के परिणाम को स्वीकार करूँगा, चाहे इसके बाद देश में राजशाही बरकरार रहे तो भी.”

रूख़ में बदलाव

बीबीसी को दिए इस साक्षात्कार का प्रसारण नेपाल के एक रेडियो स्टेशन-सगरमाथा पर होना था. रेडियो स्टेशन का कहना है कि उससे पहले पुलिस ने कार्यालय पर छापा मारा और कर्मचारियों को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया.

स्टेशन के उपकरण भी ज़ब्त कर लिए गए हैं. स्टेशन के अध्यक्ष ने कहा, "हमारी सूचना के मुताबिक़ सात अन्य रेडियो स्टेशनों को भी बीबीसी नेपाली सेवा का ये साक्षात्कार प्रसारित करने से रोका गया है."

वैसे माओवादी नेता कहते आए हैं कि उनका मकसद नेपाल को गणतंत्र बनाना है. लेकिन व्यवहारिक स्तर पर देखा जाए तो पिछले कुछ समय से माओवादिओं का राजशाही की ओर रवैया कुछ हद तक नरम रहा है.

नेपाल की मुख्य राजनीतिक पार्टियों के साथ माओवादिओं ने जो 12-सूत्रीय समझौता किया है उसमें एक बार भी ‘गणतंत्र’ शब्द का ज़िक्र नहीं है.

माओवादी नेता प्रचंड ने राजा के लिए अपशब्दों का प्रयोग करना भी बंद कर दिया है.

शाही सरकार हमेशा से ही संविधान सभा के गठन के ख़िलाफ़ रही है.

लेकिन इस बार विद्रोहियों ने नरम रूख़ अपनाया है जिससे सरकार को भी अपनी नीति पर फिर से विचार करने का मौका मिला है.

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