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नेपाल में संघर्षविराम की अवधि बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने एकतरफ़ा संघर्षविराम को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया है. संघर्षविराम की घोषणा तीन महीने पहले हुई थी. माओवादियों पर ऐसा करने का काफ़ी अंतरराष्ट्रीय और घरेलु दबाव था. फ़िलहाल सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. उधर लोकतंत्र के समर्थन में लगभग 40 हज़ार लोगों ने राजधानी काठमांडु में प्रदर्शन किया है और नरेश ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ नारे लगाए हैं. वे माँग कर रहे हैं कि नरेश ज्ञानेंद्र फ़रवरी से अपने हाथ में ली गई सत्ता छोड़े और लोकतंत्र पुन: स्थापित करें. प्रचंड का ई-मेल नेपाल में माओवादियों के नेता प्रचंड ने ई-मेल से जारी बयान के ज़रिए कहा है कि सकारात्मक रूख़ रखने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ताकतों के अनुरोध पर संघर्षविराम का समय बढ़ाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान, अमरीका और यूरोपीय संघ समते कई संगठनों और देशों ने ऐसा अनुरोध किया था और नेपाल सरकार से भी कहा था कि वह भी संघर्षविराम की घोषणा करे. लेकिन नेपाल सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया है. प्रचंड ने राजशाही पर विद्रोहियों को हिंसा के लिए उकसाने और अपना आक्रमक रूख़ जारी रखने का आरोप लगाया है. | इससे जुड़ी ख़बरें संयुक्त राष्ट्र ने समझौते का स्वागत किया24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत ने नेपाल में हुए समझौते को सराहा23 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में राजनेता-विद्रोही एकजुट हुए22 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस माओवादियों से गुपचुप मिले नेपाली नेता18 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में नगरनिकाय चुनाव की घोषणा09 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस शाही सरकार से बात नहीं करेंगे माओवादी04 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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