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काठमांडू के निकट माओवादियों का हमला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में अधिकारियों का कहना है कि माओवादी विद्रोहियों ने काठमांडू के बाहरी हिस्से में दो पुलिस थानों पर हमला किया है. हमले में 12 से अधिक पुलिसकर्मियों के मारे जाने की ख़बर है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. इससे पहले नेपाल की सेना ने कहा था कि मध्य नेपाल में हुए एक संघर्ष में 16 माओवादी मारे गए हैं. माओवादियों के ताज़ा हमले को पिछले एक वर्ष में सबसे गंभीर हमला माना जा रहा है क्योंकि इसबार हमला काठमांडू के बिल्कुल पास हुआ है. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार हमला काठमांडू के बाहरी हिस्से में थानकोट नामक जगह पर हुआ और संघर्ष में काफ़ी ख़ून-ख़राबा हुआ. सेना के एक प्रवक्ता के अनुसार दोनों तरफ़ से गोलीबारी हुई लेकिन कुछ और लोगों ने बम विस्फोट की बात की है. जिस जगह हमला हुआ वह जगह काठमांडू का प्रवेशद्वार माना जाता है. एक और हमला काठमांडू के पूर्व में एक दूसरे पुलिस थाने पर हुआ. सेना का दावा इससे पहले सेना ने मध्य नेपाल में स्यांग्जा नामक स्थान पर संघर्ष की बात की थी जिसमें उनके अनुसार 16 विद्रोही और एक सैनिक की मौत हो गई. विद्रोहियों की तरफ़ से इस हमले के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन माओवादी इससे पहले सेना पर नुक़सान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के आरोप लगाते रहे हैं. नेपाल में जनवरी के आरंभ में चार महीने से चले आ रहे माओवादियों के युद्धविराम की समाप्ति के बाद से हिंसा में काफ़ी तेज़ी आ गई है. सरकार ने ये कहते हुए युद्धविराम से हाथ पीछे खींच लिए कि विद्रोही संघर्षविराम के नाम पर खुद को हथियारबंद कर रहे हैं. नए हमले से ऐसे लगता है कि विद्रोहियों ने शहरों में गड़बड़ी फैलाने की जो धमकी दी थी उसपर उन्होंने आगे बढ़ना शुरू कर दिया है. विद्रोहियों ने धमकी दे रही रखी है कि वे अगले महीने शहरों में स्थानीय निकायों के चुनाव में बाधा पहुँचाने की कोशिश करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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