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सेना से संघर्ष में 10 माओवादी मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि नेपाली सेना ने एक संघर्ष में 10 माओवादी विद्रोहियों को मार दिया है. मंत्रालय के मुताबिक़ सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष तनाहू ज़िले के सुदूर अम्बोटे और चित्रे ज़िले में हुआ. संघर्ष के बाद विद्रोहियों के क़ब्ज़े से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं. हालाँकि उन्होंने ये नहीं बताया कि संघर्ष में नेपाली सैनिक मारे गए हैं या नहीं. नेपाली सेना के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि रात में विद्रोहियों ने सेना पर हमला किया था जिसके बाद आत्मरक्षा में सेना ने ये कार्रवाई की. अभी तक माओवादी विद्रोहियों की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं आया है. रैली काठमांडू से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर इसकी पुष्टि हो गई तो जनवरी में संघर्ष विराम ख़त्म होने के बाद माओवादियों को यह सबसे बड़ा झटका होगा.
इससे पहले राजधानी काठमांडू से 600 किलोमीटर दूर धनागध शहर में माओवादी विद्रोहियों ने कई सरकारी दफ़्तरों पर हमला किया जिसमें कम से कम तीन पुलिस अधिकारी और एक नागरिक घायल हो गया. काठमांडू में ही गुरुवार को राजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ अब तक की सबसे बड़ी रैली आयोजित हुई जिसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. विपक्ष ने इस रैली का आयोजन जनकपुर में किया था और इसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. उन्होंने राजा ज्ञानेंद्र से अधिकार छोड़ने की अपील की. विपक्ष ने अगले महीने होने वाले नगर निगम चुनाव के बहिष्कार की भी अपील की. नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र का कहना है कि माओवादी विद्रोहियों से निपटने के लिए उन्हें अधिकारों की आवश्यकता है. रैली के दौरान मौजूद कुछ लोगों का दावा है कि रैली में एक लाख लोगों ने हिस्सा लिया. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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