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गुरुवार, 01 दिसंबर, 2005 को 09:43 GMT तक के समाचार
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बिना पानी पिए महीनों से समाधि
राम बहादुर बामजान
बामजान किसी से बात भी नहीं करता है
नेपाल में एक ध्यानमग्न किशोर आजकल सबके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और उसकी वजह, जैसाकि उसके परिजन और दोस्त बताते हैं कि इस लड़के ने छह महीने से पानी नहीं पिया है और बस ध्यान लगाए हुए है.

राम बहादुर बामजान नामक इस बच्चे के रिश्तेदार और दोस्त अब इस दुविधा में हैं कि इसका ध्यान भंग किए बिना उसके स्वास्थ्य की जाँच किस तरह की जाए.

15 वर्षीय यह किशोर इस तरह ध्यान लगाकर महात्मा बुद्ध की ही तरह ज्ञान हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

यह लड़का आम लोगों का ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों के भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. उसके रिश्तेदारों ने कहा है कि यह लड़का अगले छह महीने भी इसी तरह पानी पिए बिना ही ध्यान लगाना जारी रखेगा.

इतना ही नहीं यह लड़का छह साल तक अपनी समाधि जारी रखना चाहता है, जब तक कि उसे ज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता, जिस तरह कि महात्मा गौतम बुद्ध ने पश्चिमी नेपाल में लुंबिनी में किया था.

ग़ौरतलब है कि सिद्धार्थ गौतम का जन्म ईसा पूर्व 560 में हुआ था और ज्ञान प्राप्ति के बाद वे महात्मा बुद्ध कहलाए थे.

ख़बर फैली

बारा ज़िले के रतनापुरी गाँव में ध्यान लगाए इस किशोर की ख़बर बहुत तेज़ी से फैली और यह पीपल के एक पेड़ के नीचे बिल्कुल उसी मुद्रा में बैठा है जिस तरह महात्मा बुद्ध ने समाधि लगाई थी.

गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध को समाधि में ज्ञान प्राप्त हुआ था

बामजान की आँखें बंद रहती हैं और उसका शरीर भी स्थिर है. उसके शरीर से सफ़ेद रंग की एक चादर लिपटी हुई है. उसके बाल काफ़ी लंबे हो गए हैं और उसकी आँखें काफ़ी हद तक ढक ली हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि बामजान काफ़ी कमज़ोर हो गया है. उसके बारे में अख़बारों में काफ़ी कुछ लिखा जाता है और अब लोग उसके बारे में दिलचस्पी से पढ़ते हैं.

बारा ज़िले के काफ़ी लोग तो बामजान को महात्मा बुद्ध का एक अवतार मानकर उसकी पूजा करने लगे हैं.

बामजान को देखने के लिए आने वाले लोगों की बढ़ती भीड़ से वहाँ कई दुकानें भी खुल गई हैं और कई लोगों को रोज़गार मिल गया है.

उस इलाक़े में एक सरकारी अधिकारी प्रजापति कोइराला ने बताया, "बामजान के भक्तों ने क़रीब पाँच लाख रुपए बैंक खाते में जमा कराए हैं और इसके अलावा काफ़ी लोग मौक़े पर ही दान-दक्षिणा देते हैं."

स्थानीय लोगों ने एक समिति बना दी है जो यह सुनिश्चित करती है कि बामजान को ध्यान लगाने के लिए सही माहौल मिलता रहे. यह समिति बामजान के दर्शन का भी इंतज़ाम करती है और वहाँ मिलने वाले दान का भी प्रबंधन करती है.

बड़ा सवाल ये है कि क्या बामजान रात को भी इसी तरह बैठकर ध्यानमग्न रहता है? क्या वह बिल्कुल भी खाना-पीना नहीं करता है?

कुछ लोगों का कहना है कि जब से उसने अपना यह ध्यान शुरू किया तब से उसने कुछ नहीं खाया है, कुछ का कहना है कि शुरू में वह पीपल की जड़ों से निकलने वाले दूध जैसे एक पदार्थ का सेवन करता था.

चुनौती

लोग आमतौर पर खाना खाए बिना कई सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं क्योंकि शरीर में चर्बी और प्रोटीन का जो भंडार जमा होता है उससे काम चल जाता है. लेकिन एक आम आदमी पानी पिए बिना सिर्फ़ तीन या चार दिन तक ही जीवित रह सकता है.

ईश्वर सहायता करेगा...
 मैं कभी-कभी उसे देखने जाती हूँ लेकिन वह मुझसे बात नहीं करता. मैं नहीं जानती कि उसका क्या होगा लेकिन मैं यह ज़रूर जानती हूँ कि ईश्वर उसकी सहायता करेगा.
माया देवी

इसलिए लोग बामजान के बारे में बेहद उत्सुक हैं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बामजान के बारे में सच्चाई का पता लगाने के लिए कहा है.

स्थानीय अधिकारी प्रजापति कोइराला ने कहा, "हम बामजान का एक वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए सहमत हुए हैं."

चुनौती ये है कि कोई भी परीक्षण बामजान को छुए बिना किया जाना है. कोइराला ने बताया कि नेपाल की शारी विज्ञान और प्रोद्योगिकी अकादमी के वैज्ञानिक यह परीक्षण करेंगे लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि वे यह परीक्षण किस तरह करेंगे.

परिवार

बामजान के परिजनों का कहना है कि वे नहीं समझ पा रहे हैं कि यह क्या हो रहा है. उसकी माँ माया देवी तमंग ने जब यह देखा कि बामजान ने पीपल के एक पेड़ के नीचे समाधि लगा ली है तो भौंचक रह गईं.

माया देवी ने कहा, "मैं कभी-कभी उसे देखने जाती हूँ लेकिन वह मुझसे बात नहीं करता. मैं नहीं जानती कि उसका क्या होगा लेकिन मैं यह ज़रूर जानती हूँ कि ईश्वर उसकी सहायता करेगा."

गौतम बुद्ध की माँ का नाम भी माया देवी ही था और बामजान के भक्त इस तथ्य पर बहुत ज़ोर दे रहे हैं.

परिवार का कहना है कि बामजान अपने चार भाइयों से बिल्कुल अलग रहा है. बामजान कम बोलता है और अपने आप में ही गुम रहता है.

बामजान के प्राथमिक स्कूल अध्यापक सलदेन लामा ने कहा, "उसने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया."

बामजान के एक दोस्त प्रेम लामा ने कहा कि वह नहीं चाहता कि लोग उसे बुद्ध कहकर पुकारें क्योंकि उसे अभी सिर्फ़ प्राथमिक स्तर की ज्ञान प्राप्ति ही हुई है. प्रेम लामा ने बताया कि जब से बामजान समाधि में बैठा है इक्का-दुक्का बार ही किसी से बात की है.

प्रेम लामा ने बताया कि पहली बार बामजान तब बोला था जब क़रीब एक महीने पहले उसे एक साँप ने काट लिया था. इससे पहले भी उसे साँप ने समाधि शुरू करने के तीन महीने बाद काटा था.

दूसरी बार साँप के काटने के बाद बामजान ने अपने सहयोगियों से कहा कि वे उसके चारों ओर एक पर्दा डाल दें लेकिन एक सप्ताह बाद ही उसने वह पर्दा हटाने के लिए कह दिया.

अब उसके वैज्ञानिक परीक्षण के लिए उसके चारों ओर एक और पर्दा डाला जाना है.

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