|
नेपाल में गिरफ़्तारियाँ, भारत चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में अधिकारियों ने राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाक़ों में कार्रवाई कर अनेक राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल के अनुसार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुरूवार तड़के की गई कार्रवाई में गिरफ़्तार किया गया है. भारत ने नेपाल सरकार की इस कार्रवाई पर खेद जताया है और इन गिरफ़्तारियों पर चिंता जताई है. भारत के विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत को ये ख़बरें मिली हैं कि राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी हुई है. ये भारत सहित उन सभी लोगों के लिए चिंता का विषय है जो नेपाल में शांति और स्थिरता देखना चाहते हैं. इससे पहले राजधानी काठमांडू में टेलीफ़ोन सेवाओं के बंद कर देने की ख़बर आई थी. बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार शुक्रवार को होने वाली विपक्ष की रैली से पहले अधिकारियों ने ताज़ा क़दम उठाए हैं. पिछले साल फ़रवरी में सरकार की बर्ख़ास्तगी के नेपाल नरेश के क़दम के बाद भी टेलीफ़ोन और इंटरनेट संचार संपर्क काट दिए गए थे. विरोध रैली राजा के सत्ता अपने हाथ में ले लेने के विरोध में विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को रैली करने की घोषणा की है. लेकिन सरकार ने रैली पर पाबंदी लगा दी है. सरकार का कहना है कि रैली की आड़ में माओवादी शहर में आ सकते हैं. लेकिन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वे पाबंदी की परवाह नहीं करेंगे. पिछले सप्ताह दक्षिणी पश्चिमी नेपाल में लोकतंत्र समर्थक पार्टियों ने एक रैली की थी. माना जा रहा है कि उस रैली में एक लाख से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था. सात राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन नेपाल की जनता से आह्वान कर रहा है कि वे आठ फरवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों का बहिष्कार करें. पिछले साल फरवरी में जब राजा ज्ञानेंद्र ने सरकार को बर्ख़ास्त किया था, तब भी टेलीफ़ोन और इंटरनेट सेवाएँ बंद हो गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||