|
देऊबा छह महीने बाद जेल से रिहा हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा को जेल से रिहा कर दिया गया है. नेपाल नरेश के गठित एक आयोग ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी पाया था और पिछले छह महीने से वे जेल में थे. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता अपने हाथ में लेने से पहले शेर बहादुर देऊबा देश के प्रधानमंत्री थे. देऊबा शुरु से ही इन आरोपों का खंडन करते आए हैं और वे नेपाल नरेश के गठित भष्ट्रचार आयोग को अवैध मानते थे. सोमवार को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार संबंधित मामलों की जाँच के लिए गठित आयोग को असंवैधानिक ठहराते हुए उसे भंग करने का आदेश दिया था. इसी के साथ इस आयोग के सभी फ़ैसले और देऊबा को सुनाई गई दो साल की जेल की सज़ा अवैध हो गई. नेपाल में स्थानीय चुनावदेऊबा की नेपाली कांग्रेस डेमोक्रैटिक पार्टी के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसियों से कहा कि अंतत: अदालत से उन्हें न्याय मिला है और ये लोकतंत्र की जीत और राजशाही की हार है. देऊबा की पत्नी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद वे पुलिस की उस जेल में गईं जहाँ देऊबा कैद थे और फिर कुछ ही घंटे में उन्हें रिहा कर दिया गया. पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल में स्थानीय निकाय के चुनावों में केवल बीस प्रतिशत मतदान के बाद सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से नेपाल में राजशाही को भारी धक्का लगा है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में सात पूर्व मंत्री आरोपमुक्त27 जून, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में भ्रष्टाचार जाँच के लिए आयोग17 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल में मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरफ़्तार10 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस ज्ञानेंद्र का "दुस्साहसिक" कदम 01 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र का जीवन01 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश ने सरकार बर्ख़ास्त की01 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||