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नेपाल में मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में लोकतंत्र बहाली की माँग कर रहे मानवाधिकार गुटों के प्रदर्शन को काठमांडू में सुरक्षा बलों ने जल्दी ही तितर-बितर कर दिया और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया. मानवाधिकार कार्यकर्ता जैसे ही सड़कों पर आए पुलिस ने उन्हें धर दबोचा और जल्दी-जल्दी गाड़ियों में बिठाकर वहाँ से ले जाया गया. नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने सरकार पर माओवादी हिंसा को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा की सरकार को बर्ख़ास्त करके सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं. काठमांडू में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजा के ख़िलाफ़ नारे लगाने वाले लगभग एक दर्जन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है. समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार गिरफ़्तार की गई एक महिला ने नारे लगाए, "हमारे अधिकार वापस दो, लोकतंत्र हमारी आत्मा है." मानवाधिकार गुटों और पत्रकारों के इस प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से भी कड़ी कर दी गई थी, पुलिस बल कॉलेजों, सरकारी इमारतों और महत्वपूर्ण रास्तों पर हर जगह दिखाई दे रहे थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने रायटर्स समाचार एजेंसी से कहा "हम किसी तरह का राजनीतिक प्रदर्शन नहीं होने देंगे, कोई भी सरकार और व्यवस्था के ख़िलाफ़ नहीं बोल सकता, क़ानून तोड़े वालों को छोड़ा नहीं जाएगा." इस प्रदर्शन से पहले ही अनेक मानवाधिकारवादी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था, गुरूवार के प्रदर्शन का नेतृत्व मानवाधिकारवादी नेता कृष्णा पहाड़ी को करना था लेकिन उन्हें एक दिन पहले ही हिरासत में ले लिया गया. रिहाई सरकारी रेडियो ने बताया है कि दो पूर्व प्रधानमंत्रियों--कृष्ण प्रसाद भट्टराई और लोकेंद्र बहादुर चंद सहित सात नेताओं को नज़रबंदी से रिहा किया गया है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि 43 लोगों को हिरासत में रखा गया है जबकि विपक्ष का कहना है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों की संख्या एक हज़ार तक हो सकती है. इस बीच, अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता कर्टिस कूपर ने कहा है, "अमरीका ने राजा से बार-बार कहा है कि वे कैदियों को रिहा करें, नज़रबंदी ख़त्म करें और देश में मीडिया की स्वतंत्रता को बहाल करें." हथियारबंद माओवादी विद्रोहियों ने पश्चिमी नेपाल में धनगढ़ी जेल पर बुधवार की देर रात हमला करके अपने 75 साथियों को छुड़ा लिया है. इस हमले में पाँच पुलिसकर्मियों के भी मारे जाने की सूचना मिली है, जेल परिसर में दो अज्ञात लाशें पड़ी हैं जिन्हें माओवादी हमलावर माना जा रहा है. |
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