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नेपाल में सात पूर्व मंत्री आरोपमुक्त | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में भ्रष्टाचार निरोधक समिति ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा समेत सात पूर्व मंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया है. नेपाल में भ्रष्टाचार निरोधक शाही आयोग ( रॉयल कमीशन ऑन करप्शन कंट्रोल आरसीसीसी) ने इन सभी नेताओं के ख़िलाफ़ सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप के तहत सुनवाई की थी. आरसीसीसी के प्रवक्ता ने कहा कि ये पूर्व मंत्री सरकारी धन का अनावश्यक आवंटन करते पाए गए हैं लेकिन इन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में सज़ा देने के पर्याप्त कारण नहीं हैं. इससे पहले यह आयोग इन्हीं मंत्रियों के ख़िलाफ़ पचास हज़ार डॉलर के कथित दुरुपयोग के मामले में भी सुनवाई कर चुका है. आरोपों से बरी किए गए नेताओं में शामिल हैं जोग मेहर श्रेष्ठा, युवराज गवली, पूर्ण बहादुर खड्का, मोहम्मद मोहसिन, होमनाथ दहल और बद्री प्रसाद मंडल. प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के मंत्रिमंडल में ये सभी मंत्री थे जिसे नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी माह में बर्खास्त कर दिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. नरेश ने आरसीसीसी का गठन किया था जिसे किसी भी अदालत के सारे अधिकार दिए गए थे. यह आयोग भ्रष्टाचार के मामले में किसी को भी गिरफ्तार कर सकता है और मामला चला कर सज़ा दे सकता है. पूर्व प्रधानमंत्री देउबा, एक अन्य मंत्री प्रकाश मान सिंह अभी भी एक अन्य मामले में आरसीसीसी की गिरफ्त में हैं. इन दोनों पर लाखों डालर की एक जल परियोजना में भ्रष्टाचार करने का आरोप है. हालांकि दोनों नेताओं ने आरसीसीसी की वैधता पर ही सवाल उठाए हैं और इसे असंवैधानिक करार दिया है. |
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