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नेपाल नरेश ने फ़ैसला सही बताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नरेश ज्ञानेंद्र ने चार महीने पहले सत्ता हाथ में लेने के अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए विपक्षी दलों से 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' में मदद करने की अपील की है. ज्ञानेंद्र ने शनिवार को कहा कि वह नेपाल में चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो तीन साल से नहीं हो सके हैं. नेपाल के सबसे पुराने त्रिभुवन विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए नरेश ने आपातकाल लगाने के अपने फैसले को सही ठहराया. नरेश ने एक फरवरी को नेपाल में सरकार को बर्खास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और आपातकाल लागू कर दिया था. उनका कहना था कि यह फ़ैसला देश में लोकतंत्र को आतंकवाद से बचाने के लिए किया गया और वह कोशिश करेंगे कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मज़बूत और प्रभावशाली बनाया जाए. उन्होंने यहां तक दावा किया कि जब उन्होंने सत्ता अपने हाथ में ली उस समय देश विनाश के कगार पर था. नरेश ने कहा कि देश ने पिछले तीन महीनों में सकारात्मक प्रगति की है लेकिन इस प्रगति का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया. ज्ञानेंद्र ने कहा कि वह जनता और देशहित में किसी से भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने लोकतंत्र बहाली और लोगों के मूल अधिकार बहाल करने की विपक्ष की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की. नरेश के इस भाषण से पहले दिन में ही हज़ारों लोगों ने काठमांडू में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन किया. लोग मांग कर रहे थे देश में भंग की गई संसद को बहाल किया जाए और सर्वदलीय सरकार का गठन हो. लोगों की मांग थी कि राजनीतिक क़ैदियों को तत्काल रिहा किया जाए. विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि अगर ज्ञानेंद्र ने अपनी शक्तियाँ कम नहीं की तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे. हालाँकि जानकारों के अनुसार देश की सेना के समर्थन के साथ नेपाल नरेश शायद ही अपनी शक्तियों में किसी तरह की कमी करें. |
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