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नेपाल में बस में धमाके में अनेक हताहत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में एक बस में हुए धमाके में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. नेपाल के सरकारी रेडियो स्टेशन ने कहा है कि कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है, लेकिन नेपाली सेना ने 36 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. माना जा रहा है कि यह धमाका यात्रियों से खचाखच भरी बस के एक बारूदी सुरंग से टकरा जाने के कारण हुआ. दक्षिणी नेपाल में चितवन ज़िले में हुए इस धमाके के लिए सेना माओवादी विद्रोहियों को ज़िम्मेदार बता रही है. इस धमाके में घायल हुए लगभग 70 लोगों का निकटवर्ती अस्पताल में इलाज चल रहा है. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि बस के परखच्चे उड़ गए और आसपास के वाहनों को भी भारी नुक़सान हुआ. नेपाल में पिछले कुछ समय से जारी हिंसा में बहुत बड़ी संख्या में माओवादी विद्रोही और नेपाली सैनिक मारे जाते रहे हैं लेकिन आम नागरिकों के मारे जाने की यह काफ़ी बड़ी घटना है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि घटनास्थल आठ एंबुलेंस और दमकल गाड़ियाँ पहुँचीं और घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाने के प्रयास किए गए. घायलों में अनेक लोगों की हालत काफ़ी गंभीर है इसलिए नेपाली अधिकारी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती हैं. घायलों को अस्पताल पहुँचाने के लिए हेलिकाप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इस हमले के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे विद्रोहियों की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है, काठमांडू से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि माओवादी विद्रोही आम नागरिकों पर इस तरह के हमले आम तौर पर नहीं करते. नेपाल में पिछले पाँच वर्षों से जारी माओवादी हिंसा में लगभग 12 हज़ार लोग अपनी जान गँवा चुके हैं. नेपाल में माओवादी हिंसा से निबटने में 'सरकार की नाकामी' का आरोप लगाते हुए राजा ज्ञानेंद्र ने निर्वाचित प्रधानमंत्री को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथ में ले ली है. |
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