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नेपाल में सुरक्षा चौकी पर हमला, 30 मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सेना का कहना है कि उन्होंने एक प्रमुख राजमार्ग पर स्थित सुरक्षा चौकी पर लगातार तीन बार हमला करनेवाले 26 माओवादियों को मार दिया है. पुलिस का कहना है कि इस हमले में चार सैनिक और पुलिसकर्मी मारे गए हैं और 30 से अधिक आम नागरिक घायल हो गए हैं. ऐसी ख़बरें हैं कि हमले के बाद से 39 से अधिक पुलिसकर्मी लापता हैं. ये टकराव पिछले महीने की घटना के बाद सबसे गंभीर माना जा रहा है. पिछले महीने सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच टकराव में लगभग 150 माओवादी मारे गए थे. नेपाल के दक्षिण- पूर्वी ज़िले सिराहा में सैकड़ों विद्रोहियों ने सेना और पुलिस की संयुक्त गश्त चौकी पर हमला किया. एक सैनिक प्रवक्ता का कहना था कि राजधानी काठमांडू से लगभग 450 किलोमीटर की दूरी पर बांदीपुर में स्थित सुरक्षा कैंप इसका निशाना था. दोनों पक्षों के बीच रात से शुरू हुई गोलीबारी सुबह तक चली. विद्रोहियों ने राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया था ताकि और कोई सहायता वहाँ न पहुँच सके. इसके बाद हेलिकॉप्टरों की मदद से सैन्य सहायता पहुँचाई गई. मदद ये हमला ऐसे समय हुआ है जब अमरीका में दक्षिण एशिया मामलों की प्रभारी विदेश उपमंत्री क्रिस्टीना रोका तीन दिन की सरकारी यात्रा पर नेपाल की राजधानी काठमांडू में हैं. महाराजा ज्ञानेंद्र के सत्ता सँभालने के बाद से क्रिस्टीना रोका नेपाल पहुँचने वाली पहली सबसे वरिष्ठ अमरीकी नेता हैं. भारत, ब्रिटेन और अमरीका की ओर से नेपाल को प्रमुख तौर पर सैन्य मदद मिलती है. नेपाल पिछले एक दशक से माओवादी विद्रोह की चपेट में है. माना जा रहा है कि क्रिस्टीना रोका माओवादियों को कमज़ोर करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर भी सलाह मशविरा करेंगी. |
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