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क्रिस्टीना रोका नेपाल की यात्रा पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में दक्षिण एशिया मामलों की प्रभारी विदेश उपमंत्री क्रिस्टीना रोका तीन दिन की सरकारी यात्रा पर नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुँच गई हैं. काठमांडू हवाई अड्डे पर उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वो नेपाल के बड़े नेताओं से मुलाक़ात करेंगी. उनकी मुलाक़ात नेपाल नरेश महाराजा ज्ञानेंद्र के साथ भी तय है. महाराजा ज्ञानेंद्र के सत्ता सँभालने के बाद से क्रिस्टीना रोका नेपाल पहुँचने वाली पहली सबसे वरिष्ठ अमरीकी नेता हैं. वो नेपाल के विदेशमंत्री रमेश नाथ पांडेय के साथ भी बातचीत करेंगी. सलाह मशविरा काठमांडू में अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि क्रिस्टीना रोका क्षेत्रीय मुद्दों पर सलाह मशविरा करने के लिए नेपाल पहुँची हुई हैं. कहा गया है कि सत्तापक्ष के साथ साथ क्रिस्टीना रोका विपक्ष के नेताओं से भी मिलेंगी. विपक्षी पार्टियाँ नेपाल में महाराजा ज्ञानेंद्र के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़े हुए हैं. उनके सत्ता दख़ल के बाद अमरीका, भारत और ब्रिटेन ने उनके इस क़दम की आलोचना की थी और कहा था कि नेपाल में जल्द से जल्द जनतंत्र बहाल किया जाना चाहिए. भारत और ब्रिटेन ने नेपाल को सैन्य मदद बंद कर दी थी और अमरीका ने भी कहा था कि अगर जनतंत्र बहाल नहीं किया गया तो वो भी नेपाल को फ़ौजी मदद देना बंद कर देगा. माओवादी गतिविधियाँ भारत, ब्रिटेन और अमरीका की और से नेपाल को प्रमुख तौर पर सैन्य मदद मिलती है. ये मदद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल पिछले एक दशक से माओवादी विद्रोह की चपेट में है. भारत, अमरीका और ब्रिटेन माओवादियों के ख़िलाफ़ नेपाल की सरकार को मदद देते हैं. ये तीनों देश नेपाल की राजशाही और राजनीतिक पार्टियों के बीच मेंल मिलाप की वक़ालत करते हैं. इसीलिए क्रिस्टीना रोका की इस यात्रा को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समझा जाता है कि अपनी यात्रा के दौरान क्रिस्टीना रोका एक बार फिर अमरीका की माँग को दोहराएँगी और माओवादियों को कमज़ोर करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर भी सलाह मशविरा करेंगी. |
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