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शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2007 को 15:06 GMT तक के समाचार
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राजशाही ख़त्म करने को मंज़ूरी
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र
संविधान सभा की पहली बैठक के साथ ही नेपाल में राजशाही का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा
नेपाल में माओवादियों के साथ हुए समझौते के अनुसार सांसदों ने राजशाही समाप्त करने और देश को गणतंत्र घोषित करने के निर्णय को आधिकारिक रूप से मंज़ूरी दे दी है.

नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र कुछ समय के लिए गद्दी पर बने रहेंगे क्योंकि सरकार और माओवादियों के बीच देश को गणतंत्र बनाने का समझौता नई संविधान सभा की पहली बैठक में ही प्रभाव में आ सकता है.

संविधान सभा के लिए चुनाव अप्रैल के मध्य में होना निर्धारित है.

शुक्रवार को हुए मतदान में 321 सांसदों में से 270 ने राजशाही को समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया. तीन ने इसके विरोध में मत डाला जबकि बाक़ी सांसद या तो मौजूद नहीं थे या उन्होंने मतदान नहीं किया.

सरकार और माओवादियों के बीच राजशाही को समाप्त करने को लेकर हुए 23 सूत्री समझौते के बाद संविधान में संशोधन के प्रस्ताव को संसद के पटल पर रखा गया था.

संसद के अध्यक्ष सुभाष नेमवांग ने बताया कि दो तिहाई बहुमत से संविधान में संशोधन हो गया है.

रास्ता साफ़

इस क़दम से नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित करने का रास्ता साफ़ हो गया है.

इस संशोधन से सांसदों को यह भी शक्ति मिल गई है कि अगर नेपाल नरेश चुनाव में बाधा डालने का प्रयास करते हैं तो वे चुनाव से पूर्व ही दो तिहाई बहुमत के साथ देश को गणतंत्र बना सकते हैं

तीन महीने पहले माओवादी राजशाही को ख़त्म करने की मांग को लेकर सात दलों वाली गठबंधन सरकार से बढ़ी तनातनी के बाद उससे अलग हो गए थे.

इसकी वजह से 22 नवंबर को प्रस्तावित संविधान सभा के चुनावों को टालना पड़ गया था.

नेपाल में 10 वर्षों के संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बाद राजनीतिक दलों और माओवादियों का सात दलीय गठबंधन बना था और उनमें एक शांति समझौता हुआ था.

इसके पहले राजनीतिक दलों के आंदोलन के कारण राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता की कमान छोड़नी पड़ी थी.

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