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नेपाल में राजशाही ख़त्म करने पर सहमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार देश में 240 साल पुरानी राजशाही समाप्त करने पर सहमत हो गई है. लगभग दो महीने चली बातचीत के बाद मुख्य राजनीतिक दल और माओवादियों की माँगों पर सहमत हो गए हैं. इस आशय के समझौते पर माओवादियों के अलावा गठबंधन दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं और इसे संसद से पारित करवाया जा सकता है. माओवादियों की माँग थी कि संविधान सभा के चुनाव से पहले राजशाही को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए. दूसरी ओर नेपाली कांग्रेसी के नेताओं का कहना था कि संविधान सभा को ही राजशाही का भविष्य तय करना चाहिए. नए समझौते के तहत अगले साल चुनावों के बाद नेपाल को गणराज्य घोषित कर दिया जाएगा. ग़ौरतलब है कि तीन महीने पहले माओवादी राजशाही को ख़त्म करने की मांग को लेकर सात दलों वाली गठबंधन सरकार से बढ़ी तनातनी के बाद उससे अलग हो गए थे. इसकी वजह से 22 नवंबर को प्रस्तावित संविधान सभा के चुनावों को टालना पड़ गया था. नेपाल में दस वर्षों के संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बाद राजनीतिक दलों और माओवादियों का सात दलीय गठबंधन बना था और उनमें एक शांति समझौता हुआ था. इसके पहले राजनीतिक दलों के आंदोलन के कारण राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता की कमान छोड़नी पड़ी थी. उल्लेखनीय है कि दस वर्षों तक चले माओवादियों के हथियारबंद संघर्ष में 13 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. |
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