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गुरुवार, 11 अक्तूबर, 2007 को 10:05 GMT तक के समाचार
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राजशाही के भविष्य पर अहम बहस शुरू
प्रचंड और कोइराला
नेपाली संसद के इस विशेष सत्र में राजशाही के मसले पर बहस के बाद मतदान होना है
नेपाल में अंतरिम संसद का विशेष सत्र गुरुवार को शुरू हो गया है, इसमें राजशाही को ख़त्म करने की माओवादियों की मांग पर बहस चल रही है.

संसद के इस विशेष सत्र के काफ़ी हंगामेदार रहने के आसार हैं. 328 सदस्यीय संसद में राजशाही के भविष्य पर चर्चा होगी जिस पर अगले सप्ताह मतदान होने की संभावना है.

माओवादी देश से तुरंत राजशाही को ख़त्म करने के पक्ष में हैं, जबकि प्रधानमंत्री गिरजा प्रसाद कोईराला की नेपाली कांग्रेस ने संसद में इस प्रकार के किसी प्रस्ताव का विराध करने की बात कही है.

132 सीटों वाली नेपाली कांग्रेस का कहना है कि संविधान सभा के चुनावों के बाद ही राजशाही के भविष्य पर कोई निर्णय किया जाना चाहिए.

राजशाही पर तनातनी

माओवादी नेपाल को गणराज्य घोषित करने के साथ आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्राणाली से चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं. संसद में उनकी 87 सीटें हैं.

संसद में माओवादियों के प्रमुख ह्वीप देव गुरूंग ने कहा, "हमें उम्मीद है कि राजशाही को समाप्त करने वाला हमारा प्रस्ताव संसद में मंज़ूर हो जाएगा और इसके लिए अन्य राजनीतिक दलों से भी बातचीत चल रही है."

 हमें उम्मीद है कि राजशाही को समाप्त करने वाला हमारा प्रस्ताव संसद में मंज़ूर हो जाएगा और इसके लिए अन्य राजनीतिक दलों से भी बातचीत चल रही है
देव गुरूंग, माओवादी नेता

उधर शांति और पुनर्निर्माण मामलों के मंत्री रामचंद्र पौडेल ने माओवादियों की इस मांग को असंवैधानिक बताते हुए माओवादियों से इसे वापस लेने की अपील की है.

माओवादी इन मांगों को लेकर सात दलों वाली गठबंधन सरकार से बढ़ी तनातनी के बाद पिछले महीने गठबंधन सरकार से अलग हो गए थे. जिससे 22 नवंबर को प्रस्तावित संविधान सभा के चुनावों को टालना पड़ गया था.

माओवादी प्रमुख प्रचंड ने भी अपनी मांगें नहीं माने जाने की सूरत में सरकार गिराने की धमकी दी थी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर माओवादी फिर से सड़क पर उतर आए तो सरकार के लिए स्थिति संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

नेपाल में दस सालों के संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थित के बाद पिछले साल नवंबर में राजनीतिक दलों और माओवादियों का सात दलीय गठबंधन बना था और उनमें एक शांति समझौता हुआ था.

हालाँकि कुछ जानकारों का कहना है कि राजशाही के भविष्य के मुद्दे पर माओवादियों और सरकार के बीच कुछ सहमति भी बन सकती है ओर अगले साल अप्रैल में संविधान सभा के चुनाव कराए जा सकते हैं.

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