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नेपाल राजा के सात महलों का राष्ट्रीयकरण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की सरकार ने राजा ज्ञानेंद्र के सात महलों के राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा की है. इसमें काठमांडू में राजा का निवास भी शामिल है. हालांकि सरकार ने राजा और उनके परिवारजनों को इस साल के अंत में होने वाले जनमतसंग्रह तक वहाँ रहने की अनुमति दे दी है. इस जनमतसंग्रह से यह तय किया जाना है कि नेपाल में राजशाही रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए. अंतरिम सरकार ने अब तक लिए फ़ैसलों में राजा के लगभग सभी अधिकार छीन लिए हैं. इसके तहत उन्हें राज्याध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है और न अब वे सेना के प्रमुख हैं. मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद घोषणा की गई कि जिन सात महलों का उपयोग राजा किया करते थे अब वह सरकारी हो जाएगा और इसकी अधिसूचना जल्दी ही जारी कर दी जाएगी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सूचना और संचार मंत्री कृष्णबहादुपर महारा ने बताया, "राजा जिस महल नारायणहिति में रहते थे, वह भी अब सरकारी हो जाएगा." सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि राजा ज्ञानेंद्र वह संपत्ति अपने पास रख सकते हैं जो उनके पास राजा बनने से पहले थी. राजपरिवार की ओर से अब तक इस फ़ैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. उल्लेखनीय है कि राजा ज्ञानेंद्र ने वर्ष 2001 में तत्कालीन राजा और उनके परिवार के अधिकाँश सदस्यों की हत्या के बाद राजकाज संभाला था. कथित तौर पर राजकुमार ने ही अपने परिवार के लोगों को मार डाला था. दो साल पहले राजा के ख़िलाफ़ नेपाल की जनता की नाराज़गी बढ़ गई थी. बड़े जनाआंदोलन के बाद आख़िर उन्होंने संसद को बहाल करते हुए अंतरिम सरकार को सत्ता सौंप दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाली शाही परिवार के भत्ते बंद 11 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में 'राजशाही पर ख़तरा' बढ़ा14 जून, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में राजशाही को लेकर झड़पें18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में अंतरिम संविधान पर सहमति16 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'राजा ज्ञानेंद्र ज़्यादतियों के लिए ज़िम्मेदार'20 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश से सफ़ाई माँगी गई12 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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