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नेपाल में राजशाही को लेकर झड़पें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में शनिवार को दो राजनीतिक गुटों में हुई झड़पों में कम से कम 50 लोग घायल हुए हैं. दक्षिणी नेपाल में ये झड़पें कुछ राजनीतिक दलों और एक गुट के बीच हुई. उनके बीच विवाद है कि राजशाही रहनी चाहिए या फिर ख़त्म कर देना चाहिए. इसके अलावा देश के पूर्वी भाग में दो शहरों में इसी बात पर कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और कुछ गुटों के बीच झड़प होने की ख़बरें हैं. ये झड़पें ऐसे समय में हो रही हैं जब नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना की कोशिशें चल रही हैं और इसी प्रक्रिया के रुप में कहा जा रहा है कि राजशाही को ख़त्म कर दिया जाए. इन झड़पों में घायल हुए लोगों में बहुत से लोग माओवादी विद्रोही संगठन के युवा शाखा से सदस्य हैं. ख़बरें मिली है कि कुछ राजनीतिक दलों के लोगों पर मधेशी पीपुल्स राइट्स फ़ोरम के लोगों ने हमला किया. मधेशी लोग पिछले दो महीनों से अपने अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं. गुरुवार और शुक्रवार को पूर्वी नेपाल के दो शहरों में राजशाही के समर्थन में बैठक कर रहे लोगों पर हमला किया गया था. राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने युवा माओवादी नेताओं के साथ मिलकर राजशाही समर्थकों पर हमला कर दिया. फिर राजशाही समर्थकों को पकड़ कर उनके मुँह काले कर दिए गए. छात्र नेताओं ने भी कहा है कि राजशाही का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख़्शा जाएगा. काठमाँडु से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि हालांकि नेपाल में 10 साल पुराना विवाद ख़त्म हो गया है लेकिन अभी भी वहाँ क़ानून व्यवस्था की बड़ी समस्याएँ हैं और उनमें से ज़्यादातर राजनीतिक हैं. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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