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नेपाल: प्रचार थमा, मतदान की तैयारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में संविधान सभा के चुनावों के लिए प्रचार समाप्त हो गया है और वहाँ गुरुवार को मतदान की तैयारी है. चुनाव के मद्देनज़र नेपाल में पाँच दिन का राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया गया है. इन चुनावों को संपन्न कराने के लिए लगभग एक लाख 35 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं, साथ ही बम निरोधक दस्तों को तैयार रहने को कहा गया है. ज़मीन के साथ साथ हेलिकॉप्टरों की मदद से हवाई निगरानी का भी इंतज़ाम किया गया है. उधर माओवादी और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ने भरोसा दिलाया है कि उसके कार्यकर्ता किसी भी हिंसक गतिविधि में शामिल नही होंगे. संविधान सभा के लिए होने वाले चुनाव प्रचार की अगर बात करें तो इस चुनाव प्रचार में नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने नेपाल मे लोकतंत्र की बहाली मे अपने नेताओं के योगदान और अनुभव का हवाला देते हुए मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट डालने को कहा है. परिवार का बोलबाला नेपाली कांग्रेस पूरी तरह से कोईराला परिवार के करिश्मे पर निर्भर कर रही है और उसने सुजाता कोईराला, शेखर कोईराला, सुशील कोईराला सहित कोईराला परिवार के कुल सात उम्मीदवारों को चुनाव मे उतारा है.
पार्टी के इस फै़सले को सही ठहराते हुए पार्टी के मुख्य सचिव जीवनप्रेम श्रेष्ठ कहते हैं,'' कोईराला परिवार ने लोकतंत्र स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है. अगर उनके परिवार के सात सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं तो उस पर सवाल नहीं उठाने चाहिए.'' हालांकि प्रधानमंत्री गिरिजाप्रसाद कोईराला ने अपनी पार्टी के पक्ष में प्रचार से अपने को दूर ही रखा है. यहाँ तक कि उन्होंने इस दौरान मीडिया से बातचीत से भी दूरी बनाई हुई है. माओवादियों का प्रचार उधर अगर माओवादियों की बात करें तो उसने मतदाताओं के सामने एक नए नेपाल के लिए नए विकल्प की बात की है. पार्टी ने अपने अध्यक्ष प्रचंड को नेपाल के भावी राष्ट्रपति के तौर पर पेश भी किया है, जबकि अभी तक ये तय नही हुआ है की नेपाल मे राष्ट्रपति प्रणाली होगी या फिर कार्यकारी अधिकार प्रधानमंत्री के पास ही होंगे. पार्टी ने आक्रामक चुनाव प्रचार करते हुए नेपाल के मतदाता को ये समझाने की कोशिश की है कि उनके अलावा सभी राजनीतिक पार्टियों ने राजशाही से कभी न कभी समझौता अवश्य किया है. माओवादी नेपाल की जनता को अहसास करा रहे हैं कि वो संविधान सभा मे बहुमत लाने के सबसे क़रीब हैं. जब बीबीसी ने माओवादी नेता प्रचंड से पूछा कि क्या चुनाव के बाद उनकी पार्टी का दूसरी वामपंथी पार्टियों से समझौता हो सकता है तो उनका कहना था कि अभी संविधान सभा का चुनाव है, संसद का नहीं है इसलिए अलग अलग राजनीतिक पार्टियों के साथ तालमेल ले सकता है. लेकिन ये सही है कि वामपंथी एक दूसरे के ज्यादा क़रीब हैं. माओवादी नेता प्रचंड रोलपा और काठमांडू दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. रोलपा से उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है, पर पार्टी का कहना है की वो इस भ्रम को तोड़ना चाहते हैं कि माओवादियों का आधार सिर्फ़ ग्रामीण क्षेत्र में रहा है. आमने-सामने उधर दूसरी बड़ी वामपंथी पार्टी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता माओवादियों की रणनीति को बचकानी बता रहे हैं. उनको उम्मीद है कि उसका परंपरागत आधार सुरक्षित है और माओवादी उनके आधार को कोई नुक़सान पहुँचाने की स्थिति में नही हैं. प्रचंड को भावी राष्ट्रपति के तौर पर पेश करने के फ़ैसले पर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव माधव नेपाल कहते हैं,'' अभी वोट होने दीजिए, उसके बाद कौन राष्ट्रपति होगा या राष्ट्रपति देश में होगा या नहीं, इस पर फ़ैसला होगा.'' कुल मिलाकर संविधान सभा के चुनाव प्रचार में बहस राजतंत्र की समाप्ति और गणतंत्र की बहाली और मधेशियों के आंदोलन से उठे जनजातीय और भाषाई मुद्दों पर ज़्यादा रही. पर साथ ही राजनीतिक दलों ने शिक्षा, स्वास्थ, रोज़गार और दक्षिण एशिया के देशों मे चुनाव के दौरान सबसे प्रिय मुद्दे ग़रीबी उन्मूलन पर भी नेपाल के मतदाता से वादे किए हैं. |
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