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नेपाल में मधेशियों की हड़ताल ख़त्म | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार और मधेशियों के बीच बातचीत के बाद समझौता हो गया है और इसके साथ ही 15 दिनों से चल रही मधेशियों की हड़ताल ख़त्म हो गई है. मधेशियों की हड़ताल के दौरान पूरे नेपाल में पेट्रोल और डीज़ल की क़िल्लत हो गई थी. सड़क मार्ग बंद होने की वजह से नेपाल के दूसरे हिस्सों में तेल की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी. इसके चलते खाद्य सामग्रियों की क़ीमतें भी बढ़ गईं थीं. मधेशियों का कहना था कि उन्हें पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा था और वे इसके चलते अलग मधेशी राज्य की माँग भी करने लगे थे. लेकिन सरकार और मधेशियों के बीच गुरुवार को हुई बातचीत के बाद आठ सूत्रीय समझौता हो गया है. इस समझौते के अनुसार नेपाल के दक्षिणी हिस्से को स्वायत्तता दी जाएगी. स्वायत्तता कितने राज्यों में होगी और कितनी होगी इसका फ़ैसला संविधान सभा के चुनावों के बाद किया जाएगा. मधेशी आंदोलन मधेशियों के तीन गुटों ने एक मधेशी फ़्रंट बना लिया था और वे नेपाल में एक अलग मधेशी राज्य की मांग करने लगे थे हालांकि अगल राज्य की माँग अधिकृत रुप से नहीं की गई थी. नेपाल में मधेशियों की आबादी तक़रीबन 33 प्रतिशत है.
मधेशियों की ज़्यादातर आबादी नेपाल के दक्षिणी हिस्से में भारत से लगी हुई सीमा के पास बसती है. इनका कहना था कि वर्षों से मधेशियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया. समझौते की घोषणा नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने की. यह घोषणा करते हुए उन्होंने हिंदी भाषा का भी प्रयोग किया जो कुछ मधेशियों की प्रिय भाषा है. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव से सभी गुटों की शिकायतों को दूर करने का मौक़ा मिलेगा. इस समझौते में उन लड़ाकों को शामिल नहीं किया गया है जो मधेशियों की माँगों के नाम पर लड़ रहे थे. समझौते के बाद मधेशियों ने ख़ुशी जताई है. |
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