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सोमवार, 07 अप्रैल, 2008 को 10:05 GMT तक के समाचार
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'नेपाल चुनाव पर भारत का बयान ग़लत'

नेपाल में चुनाव
नेपाल में चुनाव के बाद लोकतंत्र की राह आसान होगी
नेपाल की दो बड़ी वामपंथी पार्टियों ने भारत के उस बयान को अलोकतांत्रिक और कूटनीति के ख़िलाफ़ बताया है जिसमें भारत ने नेपाली कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी.

नेपाल की माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेताओं प्रचंड और माधव नेपाल ने कहा कि भारत से इस तरह की अपेक्षा नही की जाती.

माओवादी नेता प्रचंड ने कहा, "ये अविश्वसनीय है कि भारत ने एक पार्टी का समर्थन किया और दूसरी को नकार दिया है, ये अलोकतांत्रिक और अराजनयिक है, हालाँकि मैंने सुना है कि भारत ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण दिया है."

 हम संविधान सभा के चुनाव परिणामों को अस्वीकार कर सकते हैं, या फिर से बंदूक उठा कर जंगल में जा सकते हैं, ये भ्रम फैलाया जा रहा जिसको मैं आज साफ़ करना चाहता हूँ
प्रचंड

इसके अलावा चुनाव संबंधित हिंसा के आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच नेपाल की तीन वामपंथी पार्टियों सीपीएन (माओवादी), सीपीएन (यूएमएल) और सीपीएन (एकीकृत मशाल) के शीर्ष नेताओं प्रचंड, माधव नेपाल और प्रकाश ने एक संयुक्त बयान जारी किया है.

इन नेताओं ने कहा है कि ये पार्टियाँ अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा से दूर रहने की हिदायत देंगी और ये सुनिश्चित करेंगी कि 10 अप्रैल को होने वाले संविधान सभा के चुनाव में अधिक से अधिक मतदाता हिस्सा लें.

शांति कायम रहे

माओवादी नेता प्रचंड ने अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा, "हम जब शांति प्रक्रिया में शामिल हुए थे तो बिल्कुल स्पष्ट नीति के साथ शामिल हुए थे और जो इस तरह की चर्चा या ख़बरें सामाचार माध्यमों में आ रही हैं कि हम संविधान सभा के चुनाव परिणामों को अस्वीकार कर सकते हैं, या फिर से बंदूक उठा कर जंगल में जा सकते हैं, ये भ्रम फैलाया जा रहा जिसको मैं आज साफ़ करना चाहता हूँ."

प्रचंड ने कहा की उनकी पार्टी की कोशिश है कि नेपाल में हो रहे ऐतिहासिक चुनाव की वैधता या विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे और इसके लिए आवश्यक है कि चुनाव निष्पक्ष हो और नेपाल का आम आदमी उसमे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले.

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी यूएमएल के नेता माधव नेपाल ने कहा है कि नेपाल के चुनाव पर दुनिया भर की नज़र है. उनका कहना था कि अगर आम नेपाली को ये विश्वास दिलाना है की नेपाल मे नया इतिहास रचा जा रहा है तो इसके लिए ज़रूरी है कि उसे मतदान केंद्र तक लाया जाए.

नेपाल में चुनाव के दौरान हिंसा को रोकने के लिए हुए इस समझौते को पार्टियाँ और ख़ासतौर पर माओवादी किस हद तक लागू करेंगे, जानकारों को इसमे शक है.

पर वो ये मान रहे हैं की मीडिया के माध्यम से माओवादियों के शीर्ष नेता सहित इन सभी नेताओं का ये कहना आम लोगों में सुरक्षा और विश्वास का भाव पैदा करने के लिए मददगार तो अवश्य होगा.

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