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'निर्वासन में जाने की ख़बर बेबुनियाद' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने उन रिपोर्टों को ख़ारिज किया है जिसमें कहा गया था कि चुनाव में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सफलता के बाद वे निर्वासन में चले जाएँगे. भारतीय मीडिया में पिछले कुछ समय से यह कयास लगाया जा रहा था कि ज्ञानेंद्र निर्वासन में भारत चले जाएँगे. नेपाली राजा के प्रेस ऑफ़िस ने एक बयान जारी कर भारतीय मीडिया में राजा के निर्वासन में जाने की ख़बरों को पूरी तरह से बेबुनियाद और मनगढंत बताया है. उधर माओवादियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि राजा स्वेच्छा से अपनी गद्दी छोड़ दें. उल्लेखनीय है कि नेपाल में संविधान सभा के लिए हुए चुनाव में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. गणराज्य की शुरूआत माओवादियों ने साफ़ तौर पर कहा है कि नई संविधान सभा में राजाशाही को ख़त्म करने की कार्रवाई सबसे पहले होगी. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर माहारा ने एपीएफ़ समाचार एजेंसी को बताया, "इससे फ़र्क नहीं पड़ता है कि वे भारत में रहेंगे या नेपाल में. हमने नेपाल को एक गणराज्य घोषित करने का निर्णय किया है और राजा को यह स्वीकार करना होगा." पिछले हफ़्ते नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रमुख प्रचंड ने नेपाल टेलीविज़न पर कहा, "इतिहास गवाह है कि राजाओं की हत्या कर दी जाती थी, उन्हें भागना पड़ता था. नेपाल में यह नहीं होना चाहिए." | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल नरेश को गद्दी छोड़ने का सुझाव16 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादी 106 सीटों पर जीते15 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाली शाही परिवार के भत्ते बंद 11 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में चुनाव से पहले संशय का माहौल06 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में मतदान पूरा हुआ10 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादियों को भारी बढ़त13 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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