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नेपाल में मतदान पूरा हुआ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में संविधान सभा के अहम चुनाव के लिए मतदान छिटपुट हिंसा के बीच पूरा हो गया है. अधिकारियों का अनुमान है कि 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. हिंसा की एक घटना सरहली में हुई है जहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार की हत्या कर दी गई और दूसरी सिरहा में हुई जहाँ मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इन चुनावों पर आमतौर पर संतोष प्रकट किया है. इन चुनावों से संविधान सभा का गठन होगा जिस पर नेपाल के लिए नया संविधान रचना की ज़िम्मेदारी होगी. इन संविधान के ज़रिए नेपाल में राजशाही को ख़त्म करके लोकतंत्र की स्थापना पर मुहर लगाई जाएगी. मतदान का उत्साह सुबह नेपाल के समयानुसार कोई सवा 6 बजे नंदकेश्वरी मंदिर के प्रागंण मे बने मतदानकेंद्र के सामने सावित्री से हमारी मुलाक़ात हुई. अभी मतदान शुरू होने मे पौना घण्टा बाकी था और चुनाव अधिकारी मतदान तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे थे. लेकिन अपने ईष्टदेव की पूजा के बाद सावित्री जो पहला काम करना चाहती थी, वो था नए नेपाल के लिए वोट करना.
सावित्री ने हमें बताया कि अभी नवरात्र चल रहा है, वो पूजा करके, भगवान से प्रार्थना करके आई हैं, और चाहती हैं कि ‘एकदम सुन्दर नेपाल बने.’ सावित्री की ही तरह नेपाल के लाखों मतदाता देशभर के लगभग 22,000 मतदान केन्द्रों पर ऐसा ही जज़्बा लिए पहुंचे. एक मतदाता ने कहा कि देश में अभी संकट पड़ रहा है, और ‘इसके लिए हमें मिलजुल कर इसका सामना करना पड़ेगा. मैं सुबह साढ़े सात बजे वोट करने आया था. बरसों से इसका इंतज़ार था.’ एक दूसरे मतदाता ने हमें बताया कि वो घंटा भर चलकर वोट देने आए हैं. लेकिन कुछ एसे भी मतदाता भी थे, जो किसी ना किसी वजह से मतदान नही कर पाए. नेपाल के एतिहासिक बदलाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाने पर उन्हे मलाल था. ऐसे ही मतदाताओं ने हमें बताया कि वे वोट नहीं डाल पाए क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था. उन्होंने कहा कि वे बेहद दुखी हैं, क्योंकि ये ‘चुनाव देश बनाने के लिए है.’ सुबह मतदान की गति धीमी नज़र आई, और लाईनों मे लगे लोगों को लंबा इंतज़ार करना पङा. पर जल्द ही व्यवस्था सुचारू हुई और देखते ही देखते मतदान मे ज़बरदस्त तेज़ी आ गई. देश के अलग – अलग हिस्सों से उत्साहजनक और शांतिपूर्ण मतदान की ख़बर आने लगी. नेपाल के कई मतदान केन्द्रों से झङपों की ख़बर भी आई, और कई जगह मतदान रोकना पड़ा, या फिर कुछ समये के लिए स्थगित करना पड़ा. लेकिन कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा. मतदान केन्द्रों पर ज़्यादतर राजनीतिक कार्यकर्ता सौहार्दपूर्ण ढंग से काम करते नज़र आए. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी भी शामिल थे. उन्होंने बीबीसी से हुई बातचीत में चुनाव को लेकर संतोष ज़ाहिर किया और कहा, "बीस हज़ार मतदान केंद्रों में से दो-चार-दस में यदि गड़बड़ी होती भी है तो इससे चुनाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने पर असर नहीं पड़ता." भारी सुरक्षा इंतज़ाम, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति, नेपाल के सभी राजनीतिक दलों का ज़िम्मेदाराना व्यवहार, शायद ये सभी कारण थे की हिंसा की भारी आशंका के बावजूद नेपाल मे संविधानसभा का मतदान शांतिपूर्वक, बिना किसी बङी हिंसक घटना के निपट गया. लेकिन अगर इस मतदान का श्रेय लेने का कोई असली हक़दार है तो वो है नेपाल का आम नागरिक जो बङी तादाद मे मतदान केन्द्रों पर उमड़ पडा. |
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