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माओवादी 106 सीटों पर जीते | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में संविधान सभा के चुनाव में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) लगातार बढ़त बनाए हुए है और सरकार बनाने की ओर बढ़ती नज़र आ रही है. मंगलवार को मिले ताज़ा परिणामों के मुताबिक़ 240 सीटों पर हुए सीधे चुनावों में से 190 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. इनमें से 106 पर माओवादियों ने जीत हासिल की है. बाकी की 50 सीटों के परिणाम आने बाकी हैं और इन सीटों के लिए की मतगणना में रुझानों को देखते हुए लगता है कि माओवादी बहुमत हासिल कर लेंगे. ग्यारह सीटों पर माओवादी बढ़त बनाए हुए हैं. भट्टराई का नाम उछला समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चुनाव के नतीजों को देखते हुए माओवादियों ने नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर बाबू राम भट्टराई का नाम उछालना भी शुरू कर दिया है.
नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) में बाबू राम भट्टराई, प्रचंड के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. मिली-जुली सरकार अब तक के मिले परिणामों के अनुसार नेपाली कांग्रेस को 32 सीटें हासिल हुई हैं जबकि, नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी (यूएमएल) को 26 सीटें मिली हैं. मधेस जनादेश फ़ोरम को 17 और तराई की मधेस डेमोक्रेटिक पार्टी को चार सीटें हासिल हुई हैं. पाँच सीटें अन्य छोटे दलों के खातों में गई हैं. वहीं एक निर्दलीय उम्मदीवार ने भी जीत हासिल की है. माना जा रहा है कि नेपाल में मिली-जुली सरकार बनेगी जिसमें सबसे ज़्यादा सीटें माओवादियों के पास होंगी. पीटीआई के अनुसार नई सरकार के गठन और उसकी रूप-रेखा तय करने के लिए माओवादियों ने प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला से मुलाक़ात भी की है. प्रचंड की मुलाक़ात इस बीच माओवादी नेता पुष्प कुमार दहल उर्फ़ प्रचंड ने नेपाल में भारत के राजदूत शिवशंकर मुखर्जी से मुलाक़ात की और परिणामों के बाद के हालात पर चर्चा की.
नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सचिव केशव नेपाल के मुताबिक मुखर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत की तरफ़ से उन्हें पूरी मदद दी जाएगी. प्रचंड ने इस मुलाक़ात के दौरान दोहराया कि उनकी पार्टी भारत से संतुलित रिश्ते बनाए रखेगी. ऐसा माना जा रहा है कि प्रचंड के बाद पार्टी में दूसरे नंबर के नेता बाबू राम भट्टराई ही नेपाल का नेतृत्व करेंगे. चुनाव प्रचार के दौरान ही माओवादियों की ओर से प्रचंड का नाम राष्ट्रपति के तौर पर उछाला गया था. हालाँकि, अंतरिम संविधान में राष्ट्रपति के पद का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन माओवादियों के सरकार बनाने के बाद संविधान संशोधन के ज़रिए ही प्रचंड को राष्ट्रपति बनाया जा सकेगा. 54 वर्षीय प्रचंड पेशे से एक स्कूल शिक्षक हैं. |
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