|
बालों की ताक़त से चौंकाता एक शख़्स | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दाँतों और मूँछों के कई करतब आपने सुने होंगे लेकिन दार्जिलिंग की ट्वॉय ट्रेन को 'पोनी टेल' यानी चोटी से खींच चुके शैलेंद्र रॉय अब इसके सहारे हेलिकॉप्टर से झूलने को तैयार हैं. पिछले हफ़्ते शैलंद्र तब सुर्खियों में छाए जब उन्होंने ख़ासी भीड़ के सामने दार्जिलिंग की ट्वॉय ट्रेन को अपनी चोटी के ज़रिए खींचा. दार्जिलिंग में राज्य पुलिस के चालक की नौकरी कर रहे शैलेंद्र की योजना थी कि वे ट्रेन को 300 मीटर तक खींचें लेकिन रेल अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी है. अब उनका लक्ष्य है कि वे लोगों को हेलिकॉप्टर से अपनी मज़बूत चोटी के सहारे हवा में झूलने का करतब दिखाएँ. वे बताते हैं कि बालों की मज़बूती के लिए वे नियमित तौर पर सरसों के तेल से मालिश करते हैं और कार या दूसरे भारी सामान खींचते हैं. सुरक्षा की चिंता
सिलीगुड़ी में ट्वॉय ट्रेन की पटरी समतल है इसलिए अपनी चोटी की ताक़त के प्रदर्शन के लिए शैलेंद्र ने ट्रेन खींचने के लिए इस शहर को चुना. दार्जिलिंग ट्वॉय ट्रेन पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र है और छोटी लाइन की पटरियों पर यह दार्जिलिंग से न्यूजलपाईगुड़ी तक का सफ़र करती है. शैलेंद्र को ट्रेन खींचता देखने के लिए सिलीगुड़ी में हज़ारों लोगों की भीड़ जुटी थी. वे कहते हैं, "मेरा एक सपना पूरा हो गया है. मैंने सोचा था कि ट्रेन को कम से कम 300 मीटर तक खींचूँगा लेकिन रेल अधिकारियों ने इसकी अनुमति ही नहीं दी." रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा कारणों से रॉय को दस मीटर के बाद ट्रेन खींचने से रोक दिया गया. रॉय ने बताया कि ट्रेन को अपनी चोटी से खींचने की योजना वे पिछले एक साल से बना रहे थे. वे बताते हैं, "इसके लिए मैंने लकड़ी के भारी-भरकम गठ्ठरों को चुटियों से खींचने का अभ्यास किया." आर्थिक दिक्कत
अभ्यास के लिए वे बस, ट्रक और कारों का इस्तेमाल करते रहते हैं. यह पहली बार नहीं है कि अपनी मज़बूत चोटी की वजह से शैलेंद्र चर्चा में आए हैं. पिछले साल टेलीविज़न कैमरों के सामने वे रस्सी से बँधी अपनी चोटी के साथ एक मकान से दूसरे मकान तक चल गए थे. आर्थिक दिक्कतें उनकी राह में रोड़े अटकाती रही हैं. हेलिकॉप्टर को किराए पर लेने में भी रुपए की कमी बाधा पैदा कर रही है. यहाँ तक कि ट्वॉए ट्रेन को किराए पर लेने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे. लेकिन स्थानीय व्यापारियों की मदद के अलावा रेलवे की रियायत ने इसे मुमकिन कर दिया. रेलवे अधिकारी सुब्रत नाथ ने बताया कि रेलवे ने तीन घंटों के सामान्य किराए 26 हज़ार रुपए के बदले रॉय से मात्र 3200 रुपए ही लिए. |
इससे जुड़ी ख़बरें मूंछों की सचमुच हवाई लड़ाई12 फ़रवरी, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस पिज्ज़ा में सब्जी की जगह दांत22 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना मूँछ नहीं तो कुछ नहीं!02 सितंबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस मूँछ भत्ता, एक रूपया प्रतिदिन13 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस बेहतरीन दाढ़ी-मूँछों का मुक़ाबला02 नवंबर, 2003 | मनोरंजन एक्सप्रेस लंबी मूछों वाला चंदन तस्कर27 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना दाँत में लगने वाला फ़ोन 21 जून, 2002 | पहला पन्ना दाँतों को चमकाने की चीनी मुहिम23 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||