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मंगलवार, 13 जनवरी, 2004 को 15:44 GMT तक के समाचार
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मूँछ भत्ता, एक रूपया प्रतिदिन
पुलिसकर्मी
पुलिस में वैसे भी काफ़ी लोग मूँछें रखते हैं

मूँछ मर्दों की शान है और मूँछ नहीं तो कुछ नहीं जैसी बातें भारत में अक्सर सुनने को मिलती हैं लेकिन अगर कहीं मूँछ-भत्ता की व्यवस्था शुरू हो जाए तो...

मध्य प्रदेश के झाबुआ इलाक़े में पुलिस ने अपने अधिकारियों को मूँछ भत्ता-देना शुरू कर दिया है क्योंकि उनका मानना है कि मूँछों से रोब बढ़ता है.

झाबुआ के दस पुलिसकर्मी ऐसे हैं जिन्हें 30 रूपए प्रतिमाह की दर से मूँछ-भत्ता मिलना भी शुरू हो गया है.

झाबुआ के एसपी मयंक जैन ने बीबीसी ऑनलाइन को बताया, "लोगों पर इसका असर हुआ है, आने वाले दिनों में आपको कई मूँछवाले पुलिसकर्मी दिखाई देंगे."

मूँछों की महिमा

 मूँछों से हमारे हवालदारों का व्यक्तित्व निखर गया है, उनका रोब बढ़ा है. वे एक अच्छा माहौल बना रहे हैं और स्थानीय लोग उनका अधिक सम्मान कर रहे हैं

एसपी मयंक जैन

स्थानीय पुलिस और जनता के बीच विचार-विमर्श के एक कार्यक्रम के बाद एसपी साहब को मूँछ-भत्ता देने का आइडिया आया.

मयंक जैन कहते हैं, "पूरे कार्यक्रम में दो या तीन मूँछ वाले पुलिसकर्मी थे जिन्हें जनता बड़े प्यार और सम्मान के साथ देख रही थी. तभी मुझे लगा कि और पुलिसवालों को मूँछ बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए."

उन्होंने कहा, "भत्ता तो इस ओर लोगों को आकर्षित करने के लिए है. अच्छी मूँछ के लिए समय लगाना पड़ता है, मूँछों को काटना और संवारना होता है."

झाबुआ पुलिस के प्रमुख का कहना है कि अगले कुछ महीनों में ज़िले के सैकड़ों पुलिसकर्मी मूँछें लहराते नज़र आएँगे.

पुलिस का मानना है कि इससे उनका रोब बढ़ेगा लेकिन कुछ लोगों को लग सकता है कि रोब के बदले मूँछों के कारण वे डरावने भी नज़र आ सकते हैं.

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