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शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 05:51 GMT तक के समाचार
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'दाढ़ी हटाओ या फिर नौकरी से जाओ'

एहसान उल हक़
एहसानुल हक़ ने पिछले 29 वर्षों से दाढ़ी रखी है.
मुंबई पुलिस के सहायक सब-इंस्पेक्टर एहसान उल हक़ ग़ाज़ी शेख़ का रक्तचाप बढ़ गया है और वह बहुत भयभीत हैं क्योंकि महकमे के उच्च अधिकारियों ने उन्हें दाढ़ी साफ करने का आदेश दिया है.

उन्हें चेतावनी भी दी गई है कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया जाएगा.

नतीजा यह निकला कि इस आदेश के बाद 53 वर्षीय शेख़ का रक्तचाप बढ़ गया और उन्हें पुलिस विभाग के अस्पताल में दाखिल करना पड़ा.

शेख़ का कहना है कि इस उम्र में वह दाढ़ी कटाने की बजाय नौकरी छोड़ना पसंद करेंगे. उन्होंने वर्ष 1977 से अपनी दाढ़ी बढ़ानी शुरू की थी और अब 29 वर्ष बाद इस तरह के आदेश से उन्हें आश्चर्य भी है और दुख भी.

शेख़ के अनुसार 29 वर्षों की इस लंबी अवधि में उन्होंने कई पुलिस स्टेशनों में काम किया लेकिन कभी किसी पुलिस चौकी में उन्हें इस तरह का आदेश नहीं दिया गया.

शेख़ फिलहाल दादर पुलिस थाने में तैनात हैं और यह थाना हिंदू बाहुल्य क्षेत्र में स्थित है.

शेख़ के अनुसार पिछले महीने अप्रैल में पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार ने उन्हें दाढ़ी कटवाने का आदेश दिया और कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

दलील

जब पुलिस उपायुक्त अमिताभ गुप्ता से इस विषय में बात की गई तो उन्होंने कहा, "यह पुलिस सेवा के नियमों में है कि हिंदूओं और मुसलमानों को सिर्फ़ कुछ ही दिनों के लिए दाढ़ी रखने की अनुमति दी जाती है और वह भी उनके वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद. हिंदू सावन के महीने में दाढ़ी बढ़ाते हैं और मुसलमान हज के महीने में, उसके बाद उनको अपनी दाढ़ी हटानी होती है."

 यह पुलिस सेवा के नियमों में है कि हिंदूओं और मुसल्मानों को सिर्फ़ कुछ ही दिनों के लिए दाढ़ी रखने की अनुमति दी जाती है.
अमिताभ गुप्ता, अपायुक्त-मुंबई पुलिस

तो फिर सरदारों को क्यों इजाज़त है? यह पूछने पर अमिताभ गुप्ता कहते हैं, "उन्हें दाढ़ी रखने की इजाज़त है क्योंकि यह उनका धार्मिक मामला है."

एक अन्य पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार का कहना था कि वह किसी धर्म के विरुद्ध नहीं हैं और उन्होंने जो कुछ किया, क़ानून के दायरे में रह कर किया.

पुलिस सह-आयुक्त(प्रशासन) सुभाष आवटे ने बताया कि सन 2002 में एक सर्कुलर जारी किया गया था जिसके अनुसार किसी भी पुलिसकर्मी को दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं है चाहे वह मुस्लिम हो या हिंदू.

अगर वह दाढ़ी रखना चाहता है तो उसे यह अनुमति सिर्फ़ उन विशेष दिनों में है जब उनके धर्म के अनुसार वह बाल साफ़ नहीं कर सकता.

परेशान और भयभीत ग़ाज़ी शेख़ ने पुलिस सह-आयुक्त आवटे से अनुरोध किया है कि वह उनका तबादला किसी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के थाने में कर दें जहां कोई उनकी दाढ़ी का विरोध न करे.

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