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मूंछों की सचमुच हवाई लड़ाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी करके सरकारी एयरलाइन 'इंडियन' से पूछा है कि बड़ी मूंछों की वजह से क्यों एक विमान परिचारक को नौकरी से हटाया गया. विक्टर जयनाथ डे 'इंडियन एयरलाइंस' (अब इंडियन) में काम करते थे लेकिन 2001 में उन्हें अपनी बड़ी-बड़ी मूँछें साफ़ करने से इनकार करने पर निकाल दिया गया था. इससे पहले वे एक निचली अदालत में यह मामला हार चुके हैं जिसके निर्णय में एयरलाइंस के फ़ैसले को सही बताया गया था. विमान के केबिन दल के सभी कर्मचारियों के लिए विस्तृत दिशा निर्देश लागू किए गए हैं जिनके मुताबिक़ बड़ी दाढ़ी और मूँछें रखने की अनुमति नहीं है, अगर किसी ने मूँछें रखी भी हैं भी तो वह ऊपरी होंठ के बाहर नहीं आनी चाहिए. ये नियम सिख कर्मचारियों पर लागू नहीं होते जिन्हें मूँछें रखने की इजाज़त है. स्वास्थ्य को ख़तरा सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एचके सेमा और जस्टिस मार्कंडेय काटजू की बेंच ने पूछा है, "किसी व्यक्ति की मूँछों के आकार की वजह से कैसे उसे नौकरी से बाहर किया जा सकता है?" एयरलाइंस को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है.
डे की मूंछों पर विवाद तब शुरू हुआ जब इंडियन एयरलाइंस ने तर्क दिया कि उनकी मूंछें यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए ख़तरा हैं, ख़ासकर इसलिए क्योंकि उनका काम यात्रियों को भोजन देना है. एयरलाइंस के एक प्रवक्ता ने कहा कि डे के कार्यकाल के वक़्त कंपनी की नियमावली मूँछें रखने की अनुमति नहीं देती थी क्योंकि यह अस्वच्छ हो सकता था. प्रवक्ता ने कहा कि कुछ यात्रियों को डे की मूँछें ख़राब लग सकती हैं. डे का कहना रहा है कि उन्हें अपनी मूँछों पर नाज़ है जिन्हें बढ़ने में पच्चीस साल लगे हैं और जो अब उनके गालों पर दोनों ओर काफ़ी बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा "मैंने कभी अपनी मूँछें कतरने की सोची भी नहीं. जितने दिन मैंने एयरलाइंस में काम किया, मेरी मूँछों की ओर सराहना भरी नज़रें ही आती रहीं." डे बीस साल से भी ज़्यादा समय से एयरलाइंस की नौकरी में रहे हैं. वे लंदन के प्रसिद्ध 'हैंडलबार क्लब' के सदस्य हैं जिसने उन्हें निकाले जाने के विरोध में अभियान चलाया है. | इससे जुड़ी ख़बरें मूंछें रखो तो मिलेगा ईनाम05 फ़रवरी, 2005 | खेल की दुनिया मूँछ भत्ता, एक रूपया प्रतिदिन13 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस चुनावी दाँव पर जूदेव की मूँछें25 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस बेहतरीन दाढ़ी-मूँछों का मुक़ाबला02 नवंबर, 2003 | मनोरंजन एक्सप्रेस मूंछ पर ज़ोर नहीं01 जनवरी, 1970 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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