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चुनावी दाँव पर जूदेव की मूँछें
पुराने ज़माने में बात बात में मर्द मूँछों की दुहाई देते थे कि ऐसा न हुआ तो अपनी मूँछें मुड़वा दूँगा वैसा न हुआ तो मूँछें मुड़वा दूँगा. अब ज़माना बदल गया है और लोग बात बेबात ही मूँछें मुड़वा कर घूमते रहते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के जशपुर के पुराने राज परिवार से जुड़े दिलीप सिंह जूदेव के लिए मूँछों का महत्व अभी भी वैसा ही है और उनके लिए मूँछों का मतलब अब भी आन-बान-शान सब कुछ है. हालाकि वे आदिवासियों के नेता माने जाते हैं लेकिन हैं वे ठाकुर यानी राजपूत ही. और फिर वे छत्तीसगढ़ में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार भी हैं. इसीलिए उन्होंने छत्तीसगढ़ के चुनाव में दाँव पर अपनी मूँछें ही लगा दी हैं. जिन्होंने उनकी मूँछें देखी हैं वे समझ सकते हैं कि मूँछों को दाँव पर लगाने का मतलब उनके लिए क्या हो सकता है. उन्होंने इसकी सार्वजनिक घोषणा करते हुए कहा, ''अगर अजीत जोगी की सरकार न हटी तो हम अपनी मूँछें मुड़ा देंगे.'' हालांकि इस घटना के बाद ही इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में उनके रिश्वत लेने वाली फ़िल्म की ख़बर छप गई और अब उनका नाम चारों राज्यों के चुनाव में मुद्दा बना हुआ है. और मुख्यमंत्री अजीत जोगी चुटकी ले रहे हैं, ''मूँछें कटाने चले थे नाक कटा आए.'' इस तरह का प्रण करने वाले जूदेव अकेले नहीं हैं उनकी ही पार्टी के सांसद पीआर खुंटे ने कहा था कि जब तक वे अजीत जोगी को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा लेते वे काले रंग का दुपट्टा अपने कंधे पर टाँगे रहेंगे. उन्होंने लंबे समय तक ऐसा किया भी और संसद तक में वे काले दुपट्टे के साथ दिखते रहे. लेकिन राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद पिछले हफ़्ते ही वे भाजपा छोड़कर अजीत जोगी के साथ काँग्रेस में चले गए हैं. |
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